BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 28 NOVEMBER 2017 – Aaj Baba ne Kaha

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*Om Shanti*
*28.11.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

बच्चे, जहाँ आकर्षण है, वहाँ असंतुष्टता है और जहाँ असंतुष्टता है, वहीं हलचल है।

जबकि इस तमोप्रधान दुनिया में आकर्षण बहुत बढ़ रहा है तो हलचल भी बहुत बढ़ रही है, जिससे सभी आत्मायें बहुत दुःखी और परेशान हो रही है और बच्चे यह सब कुछ अति में जाना ही है। 
चाहे लौकिक परिवार, चाहे अलौकिक सब जगह परेशानियाँ बढ़नी ही है … ऐसे समय में जबकि बाप आप बच्चों को सभी जगह से न्यारा कर विशेष पालना दे रहा है तो आप बच्चों को भी अपनी स्व-स्थिति की तरफ विशेष अटेन्शन रखना चाहिए।

यदि आप सोचते हों कि मैं वाचा, कर्मणा या संकल्प द्वारा इन सब परिस्थितियों को दूर कर दूँ, तो यह सम्भव नहीं है क्योंकि आपको पहले स्वयं को सम्पूर्ण रीति तैयार करना पड़ेगा अर्थात् इन सब तरह की बातों से स्वयं को न्यारा कर पाॅवरफुल बनाना पड़ेगा, तब ही आपकी पाॅवरफुल स्थिति आपके आस-पास के हलचल को खत्म कर सकेगी। इसलिए स्वयं को अचल-अडोल बनाना है जो आप केवल बाप की श्रीमत प्रमाण ही कर सकते हो।

इसके लिए आपको यह स्मृति रहनी चाहिए कि मेरी स्वयं की स्थिति से ही परिस्थिति खत्म होगी और जितनी मेरी स्व-स्थिति पाॅवरफुल होगी, उतना ही उसका प्रभाव दूर-दूर तक जायेगा।

इसलिए इस समय स्वयं को हर बात से न्यारा कर अपनी स्व-स्थिति बनानी है, फिर यहीं आपकी स्व-स्थिति आपको स्वयं ही सबका प्यारा बना देगी। इसलिए स्वयं पर फुल अटेन्शन रखो।

देखो बच्चे, यही समय है पुरूषार्थ का … फिर कल्प में कभी भी आपको यह समय नहीं मिलेगा…!

और पुरूषार्थ के बिना प्रालब्ध भी नहीं बन सकती । इसलिए स्वयं को हर बात से न्यारा कर अपनी हर समस्या, चाहे किसी भी तरह की हो, बाप को संकल्पों द्वारा समर्पण कर बाप की श्रीमत पर पूरा-पूरा चलने का पुरूषार्थ करना है।

अब पुरूषार्थ का समय बहुत ही लिमिटेड रह गया है।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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