Avyakt Murli

Bapdada Milan Avyakt Murli – 15/12/19

30-01-10   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

‘‘चारों ही सबजेक्ट में स्वमान के अनुभवी स्वरूप बन अनुभव की अथॉरिटी को कार्य में लगाओ’’

आज ब्राह्मण संसार के रचयिता बापदादा अपने चारों ओर के ब्राह्मण संसार को देख रहे हैं। हर एक ब्राह्मण सारे संसार में विशेष आत्मा है। कोटों में कोई है क्योंकि साधारण तन में आये हुए बाप को पहचान लिया। बापदादा भी दिल में समाने वाले बच्चों को दिल से दिल का प्यार दे रहे हैं। हर एक बच्चा अपने को ऐसे बाप का प्यारा दिल में बाप को समाया हुआ अनुभव करते हैं! बाप के लिए हर बच्चा अति प्यारा सर्व का प्यारा है। आप सभी बच्चों का सर्व आत्माओं के प्रति चैलेन्ज है कि हम योगी जीवन वाले हैं। सिर्फ योग लगाने वाले नहीं लेकिन योगी जीवन वाले हैं। जीवन दो चार घण्टे की नहीं होती। जीवन सदाकाल के लिए होती है। तो चलते फिरते कर्म करते योगी जीवन वाले निरन्तर योगी हैं। चाहे योग में बैठते, चाहे कोई भी कर्म करते कर्मयोगी हैं। जीवन का लक्ष्य ही है सदा योगी। ऐसे अपनी योगी जीवन, नेचरल जीवन अनुभव करते हो? बापदादा हर बच्चे के मस्तक में चमकता हुआ भाग्य देखते हैं। क्या देखते हैं? मेरा हर बच्चा स्वमानधारी, स्वराज्य अधिकारी है। क्यों? जहाँ स्वमान है वहाँ देहभान आ नहीं सकता। आदि से अन्त तक, अब तक बापदादा ने हर एक बच्चे को भिन्न-भिन्न स्वमान दिये हैं। अगर अभी भी स्वमानों को याद करो और एक-एक स्वमान की माला फेरते जाओ तो अनेक स्वमान स्वरूप बन, स्वमान में लवलीन हो जायेंगे। लेकिन बापदादा को एक बात बच्चों की अब तक भी अच्छी नहीं लगती, वह जानते हो कौन सी? जब कोई भी बच्चा कहता है कि हमें स्वमान में स्थित होने में कभी-कभी मेहनत लगती है, चाहते हैं लेकिन कभी-कभी मेहनत लगती है तो बाप सर्वशक्तिवान बच्चों की मेहनत नहीं देख सकते। क्योंकि जहाँ मोहब्बत होती है वहाँ मेहनत नहीं होती है। जहाँ मेहनत है वहाँ मोहब्बत में कमी है।

तो आज अमृतवेले बापदादा ने चारों ओर के ब्राह्मणों के पास चाहे देश चाहे विदेश में चक्कर लगाया तो क्या देखा? कोई-कोई बच्चे स्वमान में बैठे हैं, सोच रहे हैं कि मैं बापदादा के दिलतख्त नशीन हूँ, सोच भी रहे हैं, स्वमान में स्थित होने का पुरूषार्थ भी कर रहे हैं लेकिन कमी क्या देखी? स्वमान याद है, सोच रहे हैं, लेकिन स्वमान स्वरूप बन, अनुभवी मूर्त बन अनुभव के अथॉरिटी स्वरूप बनने में कमी दिखाई दी क्योंकि अथॉरिटी तो बहुत है लेकिन सबसे बड़ी अथॉरिटी अनुभव की अथॉरिटी है और यह स्वमान की अनुभूति आलमाइटी अथॉरिटी ने दी है। तो मेहनत कर रहा है लेकिन अनुभव स्वरूप नहीं बना। तो बापदादा ने यह देखा कि बैठते हैं, सोचते भी हैं लेकिन अनुभव स्वरूप कोई-कोई हैं। अनुभव में किसी भी प्रकार का देह अभिमान जरा भी अपने तरफ खींच नहीं सकता। तो अनुभव स्वरूप बन जाना, कर्म करते भी कर्मयोगी के अनुभव स्वरूप में खो जाना, इसकी अभी और आवश्यकता है। स्वरूप में बन जाना। हर बात में, हर सबजेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनना, चाहे ज्ञान, योग, धारणा और सेवा, चार ही सबजेक्ट में अनुभव स्वरूप बनना। अनुभवी को माया भी हिला नहीं सकती इसलिए बापदादा आज सभी बच्चों को अनुभवी स्वरूप में देखने चाहते हैं। सुनने और सोचने में फर्क है लेकिन अनुभवी स्वरूप बनना, जो सोचा, जिस स्वमान में स्थित रहने चाहे उसके अनुभव स्वरूप में स्थित हो जाए। अनुभव को कोई भी हिला नहीं सकता क्योंकि स्वमान और देहभान, जहाँ स्वमान स्वरूप है, स्वमान के अनुभव में स्थित है वहाँ देह भान आ नहीं सकता। जैसे देखो अंधकार है लेकिन स्विच आप ऑन करो रोशनी का तो अंधकार ऑटोमेटिकली गायब हो जाता। अंधकार को मिटाने में, अंधकार को भगाने में मेहनत नहीं करनी पड़ती। ऐसे ही जब स्वमान के सीट पर अनुभव का स्विच ऑन होता तो किसी भी प्रकार का देहभान, भिन्न-भिन्न प्रकार के देह भान भी हैं और भिन्न-भिन्न प्रकार के बाप ने स्वमान भी दिये हैं। स्वमान को जानते हैं, पुरूषार्थ भी करते हैं लेकिन अनुभव का पुरूषार्थ करना और अनुभवी स्वरूप बनना उसमें अन्तर है इसलिए मेहनत करनी पड़ती है। तो बापदादा को अब समय प्रमाण बाप समान बनने का लक्ष्य सम्पन्न करने समय यह मेहनत करना अच्छा नहीं लगता, हर एक अपने को चेक करो कि मैं कर्मयोगी जीवन वाला हूँ? जीवन नेचरल और सदाकाल की होती है, कभी-कभी की नहीं। ऐसा अनुभवी स्वरूप बनाओ जो लक्ष्य है योगी जीवन का, जो लक्ष्य है अनुभवी मूर्त बनने का वह लक्ष्य सम्पन्न है? सदा मस्तक से चमकती हुई लाइट खुद को भी अनुभव हो, खुद भी उस स्वरूप में स्थित हो, स्मृति स्वरूप हो, स्मृति करने वाला नहीं स्मृति स्वरूप हो और स्मृति स्वरूप है या नहीं, उनका प्रमाण यह है कि जहाँ स्मृति के अनुभवी स्वरूप हैं वहाँ अपने में समर्थी हर कार्य करते हुए भी अनुभव होगी। कार्य भिन्न-भिन्न होंगे लेकिन अनुभव स्वरूप की स्थिति भिन्न-भिन्न नहीं हो।

तो आज बापदादा ने देखा कि मेहनत क्यों करनी पड़ती? अनुभव स्वरूप बनने का नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार देखा। तो बापदादा का हर एक बच्चे से जिगरी प्यार है तो प्यार वाले की मेहनत देखी नहीं जाती। चाहे किसी भी सबजेक्ट में मेहनत करनी पडती है, कभी-कभी शब्द यूज करना पड़ता है, इसका कारण है अनुभवी स्वरूप बनने की कमी। पुरूषार्थी है लेकिन स्वरूप नहीं बने हैं। एक सेकण्ड में चार ही सबजेक्ट में अपने स्वमान के अनुभवी स्वरूप की अनुभूति होनी चाहिए। जो देह अभिमान नजदीक आ नहीं सके। जैसे रोशनी के आगे अंधकार ठहर नहीं सकता। निकालना नहीं पड़ता, नेचरल जहाँ अंधकार है वहाँ रोशनी कम है या नहीं है। तो सबसे बड़े में बड़ी अथॉरिटी अनुभव गाया हुआ है। अनुभव को हजारों लोग बदलने चाहे, बदल नहीं सकते। जैसे आप सबने चीनी का अनुभव करके देखा है कि वह मीठी होती है, अगर हजारों लोग आपको बदलने चाहे, बदल सकते हो? तो जो भी सबजेक्ट हैं, चाहे ज्ञान की, चाहे योगी की, चाहे धारणा की, चाहे सेवा की, किसी में भी चार में से एक में भी मेहनत लगती है, मिटाने की, सेवा में भी सफलता, धारणा में भी स्वभाव परिवर्तन की, योग में भी अचल रहने की, योगी जीवन की अनुभूति करने की, जहाँ मेहनत है या कभी-कभी कहते हो, इसका अर्थ है उस सबजेक्ट में आप अनुभवीमूर्त नहीं बने हो। अनुभव कभी-कभी नहीं होता, नेचरल नेचर होती है। तो अभी सुना मेहनत करने का कारण क्या? जिस भी समय आपको अनुभव होगा कि जब अनुभव की सीट पर सेट होते हो, किसी भी वरदान के स्वरूप में अनुभवी बन अनुभव करते हो तो उस समय मेहनत करनी होती है? नेचरल अनुभूति होती है। इसलिए अभी समय प्रमाण सब अचानक होना है। बताके नहीं होना है। जैसे अभी प्रकृति का अचानक बातों का खेल चल रहा है, आरम्भ हुआ है अभी। नई-नई बातें अचानक अर्थक्वेक हुआ, थोड़े समय में लाखों आत्मायें चली गई, क्या उन्हों को पता था कि कल हम होंगे या नहीं? ऐसे कई एक्सीडेंट, भिन्न-भिन्न स्थान पर अचानक होना आरम्भ हो गया है। इकट्ठे के इकट्ठे एक समय अनेकों की टिकेट कट रही है तो ऐसे समय में आप एवररेडी हैं? यह तो नहीं कहेंगे कि पुरूषार्थ कर रहा हूँ? एवररेडी अर्थात् कोई भी वरदान या स्वमान का संकल्प किया और स्वरूप बना इसलिए बापदादा आज इस बात पर अटेन्शन दिला रहे हैं कि किसी भी वरदान को फलीभूत कर वरदान या स्वमान के स्वरूप के अनुभवी बन सकते हो? बनना ही पड़ेगा। कोशिश कर रहा हूँ, अगर कोशिश भी करनी है तो अभी से क्योंकि बहुत समय का अभ्यास समय पर मदद देगा। पुरूषार्थी नहीं, अनुभवी क्योंकि अनुभव की अथॉरिटी आप सबको आलमाइटी अथॉरिटी ने दी है। जैसे देह भान के अनुभवी है, तो देहभान को याद करना पड़ता है क्या कि मैं फलाना हूँ! मानों आपका नाम देह पर पड़ा, तो देहभान हो गया ना, मैं फलाना हूँ, अगर हजारों लोग भी आपको कहे कि आप फलाना नहीं हो, आप यह हो, नाम बदली करके कहे तो आप मानेंगे?भूलेंगे अपना नाम! जन्म लेते जो नाम पड़ा वह देहभान कितना पक्का और नेचरल रहता है। कोई और को भी आपके नाम से बुलायेंगे, आपको नहीं बुलाना है, लेकिन आपके नामधारी को बुला रहे हैं, आपका कान नाम सुनते अटेन्शन जायेगा मुझे बुला रहा है। तो देहभान इतना पक्का हो गया है। ऐसे देही अभिमानी, स्वमानधारी, स्वराज्य अधिकारी इतना पक्का हो। आप कहते हो ना, हमारा जीवन परिवर्तन है तो परिवर्तन क्या किया? देह भान से स्वमान, स्वराज्य अधिकारी बनें। तो चेक करो ज्ञान स्वरूप बना हूँ? या ज्ञान सुनने और सुनाने वाला बना हूँ? ज्ञान अर्थात् नॉलेज, नॉलेज का प्रैक्टिकल रूप है, नॉलेज को कहते हैं, नॉलेज इज लाइट, नॉलेज इज माइट, तो ज्ञान स्वरूप बनना अर्थात् जो भी कर्म करेंगे वह लाइट और माइट वाला होगा। यथार्थ होगा। इसको कहा जाता है ज्ञान स्वरूप बनना। ज्ञान सुनाने वाला नहीं, ज्ञान स्वरूप बनना। योग स्वरूप का अर्थ है कर्मेन्द्रियों जीत बनना। हर कर्मेन्द्रिय पर स्वराज्यधारी। इसको कहा जाता है योग अर्थात् युक्तियुक्त जीवन। ऐसे अगर ज्ञान योग का स्वरूप है तो हर गुण की धारणा ऑटोमेटिकली होगी। जहाँ ज्ञान, योग है, योगयुक्त है वहाँ गुणों की धारणा ऑटोमेटिकली होगी। सेवा हर समय ऑटोमेटिक होगी। समय अनुसार चाहे मन्सा सेवा करे, चाहे वाचा करे, चाहे कर्मणा करे, चाहे स्नेह सम्बन्ध में करे, सेवा भी हर समय अखण्ड चलती रहेगी। सम्बन्ध सम्पर्क में भी सेवा होती है। मानो कोई आपके भाई या बहन ब्राह्मण परिवार में थोड़ा सा मायूस है, थोड़ा पुरूषार्थ में डल है, कोई संस्कार के वश है, ऐसे सम्पर्क वाली आत्मा को आपने उमंग-उत्साह दिलाया, सहयोग दिया, स्नेह दिया, यह भी सेवा का पुण्य आपका जमा होता है। गिरे हुए को उठाना यह पुण्य गाया जाता है। तो सम्बन्ध और सम्पर्क में भी सेवा करना यह सच्चे सेवाधारी का कर्तव्य है। सेवा मिले या सेवा दी जाए तो सेवा है, वह नहीं। स्वयं मन्सा, वाचा, कर्मणा, सम्पर्क सम्बन्ध में सेवा ऑटोमेटिकली होती रहे। कई बार बापदादा ने देखा कि सम्पर्क में कोई-कोई बच्चा देखता भी है कि इनका स्वभाव संस्कार थोड़ा जो होना चाहिए वह नहीं है, लेकिन यह तो है ही ऐसा, यह बदलना नहीं है, इसकी सेवा करना टाइम वेस्ट है, ऐसा संकल्प करना क्या यथार्थ है? जब आप मानते हो कि हम प्रकृति को भी सतोप्रधान बनाने वाले हैं, प्रकृति को और वह मनुष्यात्मा है, ब्राह्मण कहलाता है लेकिन संस्कार वश है, जब प्रकृति का संस्कार बदलने की चैलेन्ज की है तो वह तो प्रकृति से पुरूष है, आत्मा है। आपके सम्बन्ध में है। तो सच्चा सेवाधारी अपने सेवा का पुण्य कमाने का शुभ भावना अवश्य रखेगा। यह तो है ही ऐसा, यह बदल ही नहीं सकता, यह शुभ भावना नहीं, यह सूक्ष्म घृणा भावना है, फिर भी अपना भाई बहन है, फिर भी मेरा बाबा तो कहता है ना! तो सच्चे सेवाधारी सेवा के बिना शुभ भावना देना इस सेवा में भी पुण्य कमायेंगे। गिरे हुए को गिराना नहीं, उठाना। सहयोग देना, इसको कहेंगे सच्चे सेवाधारी, पुण्य आत्मा। तो ऐसे अपने को चेक करो इतना सेवा का उमंग-उत्साह है? इसको कहा जाता है अनुभव के अथॉरिटी वाला। तो अभी बापदादा यही चाहता है, अनुभवी मूर्त बनो, अनुभव की अथॉरिटी को कार्य में लगाओ।

तो चार ही सबजेक्ट में जो अपने को अनुभवी स्वरूप बन अनुभव के अथॉरिटी को कार्य में लगायेंगे, जो कमी हो उसको सम्पन्न करेंगे, इतना अटेन्शन देंगे अपने पर वह हाथ उठाओ। मन का हाथ उठा रहे हो ना! शरीर का हाथ नहीं, मन का हाथ। उठाओ। मन का हाथ उठाना क्योंकि बापदादा शिवरात्रि पर रिजल्ट लेंगे। मन में कोई का भी कमी का संस्कार अपनी शुभ भावना को कम नहीं करे। उसका संस्कार तो ढीला है लेकिन वह इतना तो पावरफुल है जो आपकी शुभ भावना को कम कर लेता है इसलिए जैसे ब्रह्मा बाप ने क्या नहीं देखा, क्या नहीं किया, जिम्मेवार होते फिर भी अन्त में शुभ भावना, शुभ कामना के तीन शब्द सभी को शिक्षा देके गये। याद है ना! तीन शब्द याद हैं ना! स्वयं भी निराकारी, निरहंकारी, निर्विकारी इसी स्थिति में अव्यक्त बनें, किसी को भी कर्मभोग की फीलिंग नहीं दिलाई, किसने समझा कि कर्मभोग समाप्त हो रहा है!क्या हो गया? अव्यक्त हो गया। ऐसे ब्रह्मा बाप समान फरिश्ता भव का वरदान जो बाप ने करके दिखाया, फॉलो ब्रह्मा बाप। ब्रह्मा बाप से प्यार रहा, अभी भी चाहे साकार में नहीं देखा लेकिन अव्यक्त बाप के रूप में भी स्नेह सबका है। बापदादा दोनों से स्नेह में देखा गया है कि स्नेह की सबजेक्ट में मैजारिटी पास हैं। स्नेह ही चला रहा है। चाहे धारणा नहीं भी हो, कोई भी सबजेक्ट में कमी हो, लेकिन स्नेह की सबजेक्ट में मैजारिटी सभी पास हैं। स्नेह चला रहा है। आप सभी क्यों आये हैं?किस विमान में आये हो? स्नेह के विमान में पहुंचे हो। और बापदादा का भी लास्ट बच्चे से भी प्यार है। कैसा भी है लेकिन प्यार में पास है क्योंकि बाप का हर बच्चे के प्रति दिल का प्यार है। चाहे कैसा भी है लेकिन मेरा है। जैसे आप कहते हो मेरा बाबा, तो बाप क्या कहते हैं? मेरे बच्चे हैं। ऐसी शुभ भावना आपस में परिवार की भी होना आवश्यक है। स्वभाव नहीं देखो, बाप जानते हैं, भाव स्वभाव है, लेकिन भाव स्वभाव, प्यार को खत्म नहीं करे, सम्बन्ध को खत्म नहीं करे, कार्य को सफल कम करे यह राइट नहीं। परिवार है। कौन सा परिवार है? प्रभु परिवार, परमात्म परिवार। इसमें कोई भी कारण से प्यार की कमी नहीं होनी चाहिए। ऐसे है? है प्यार की कमी? प्यार अर्थात् शुभ भावना जरूर हो। कैसा भी है, परमात्म परिवार है। जिसने माना कि मैं प्रभु परिवार का हूँ, तो परिवार अर्थात् प्यार। अगर परिवार में प्यार नहीं तो परिवार नहीं। इसलिए आज क्या पाठ पढ़ा? पक्का किया? हर आत्मा से शुभ भावना, शुभ भाव। यह परमात्म परिवार एक से एक समय ही होता है, इतना बड़ा परिवार परमात्मा के सिवाए और किसका हो ही नहीं सकता। तो चेक करना क्योंकि यह भी पुरूषार्थ में विघ्न पड़ता है। तो विघ्न मुक्त होंगे तभी अनुभवी बन अनुभव के अथॉरिटी द्वारा सभी को अनुभवी बनायेंगे। अच्छा।

आज जो पहली बार आये हैं वह उठके खड़े हो। हाथ हिलाओ। बापदादा पहले बारी आने वालों को विशेष मुबारक दे रहे हैं क्योंकि टूलेट के बजाए लेट में भी आ तो गये। और बापदादा सभी आने वालों को यह खुशखबरी सुनाते हैं कि अगर देरी से आने वाले भी तीव्र पुरूषार्थ अर्थात् उड़ती कला का पुरूषार्थ कर आगे बढ़ने चाहे तो तीव्र पुरूषार्थ द्वारा आगे जा सकते हो। लेकिन तीव्र पुरूषार्थ। साधारण पुरूषार्थी नहीं। हर बारी बापदादा पहले बारी आने वालों को देख खुश भी होते हैं और सभी आने वाले को परिवार, सारा ही परिवार आपको देख करके खुश होते हैं। आ तो गये हैं, कुछ न कुछ वर्सा लेने के अधिकारी तो बनेंगे इसलिए बापदादा भी कहते हैं भले पधारे, बाप के बिछुडे हुए बच्चे भले पधारे। अच्छा। बैठे जाओ। अच्छा।

सेवा का टर्न – राजस्थान और इन्दौर का है:- अच्छा पहले इन्दौर वाले हाथ उठाओ। अभी राजस्थान वाले हाथ उठाओ। अच्छा। दोनों ने अपनी सेवा का पार्ट अच्छा बजाया है। बापदादा ने देखा है कि यह सेवा का चांस सभी उमंग-उत्साह से करते भी हैं और कराते भी हैं। सेवा का यह पार्ट इन 10-15 दिन में भिन्न-भिन्न कमाई का साधन है। एक फायदा यह है कि सेवा का मेवा हर एक का पुण्य जमा होता है। दूसरा फायदा यहाँ मधुबन का ज्ञान का वायुमण्डल, बड़े परिवार का वायुमण्डल, स्नेह का पुरूषार्थ में भी बल मिलता है। क्योंकि वायुमण्डल वायबे्रशन और ज्ञान स्नान एक बारी तीर्थो पर स्नान करने जाते हैं तो अपना बहुत पुण्य मानते हैं और यहाँ जितने दिन भी रहते हो उतने दिन ज्ञान स्नान, ज्ञान के वचन कानों में पड़ते रहते हैं। और योगी आत्मायें, प्रभु प्यार वाली आत्मायें उनका वायबे्रशन भी आटोमेटिकली मिलता रहता है। एकान्त के वायुमण्डल का लाभ मिलता है। अगर कोई अपने काम में और पढ़ाई में फायदों में अपने को बिजी रखता है तो उनको थोड़े दिनों में अपना भविष्य ऊंचा बनाने का चांस मिलता है। इसलिए यज्ञ का काम भी चलता और आने वालों का पुण्य भी जमा होता। दोनों ही ज़ोन आये हैं लेकिन बापदादा ने देखा कि आजकल के वायुमण्डल में सेवा का उमंग मैजारिटी सभी जॉन में है। इन्दौर भी सेन्टर बढ़ा भी रहे हैं और सन्देश देकर बाप के बना रहे हैं। राजस्थान भी ऐसे ही आगे बढ़ रहे हैं। आजकल की लहर सेवा का उमंग सभी में है और बापदादा भी इशारा दे रहे हैं कि जिस भी ज़ोन वाले हों, जहाँ से भी आये हो, शिवरात्रि बाप का जन्म भी है, सेवा का आरम्भ भी है और विशेष आत्माओं का भी जन्म दिन है। ऐसे जैसे कोई आजकल के गवर्मेन्ट का नामीग्रामी का जन्म होता है तो उस जन्म को धूमधाम से मनाते हैं, जैसे गांधी बापू जी का जन्म दिन कितना मनाते हैं, कोशिश करते हैं कि ऐसे दिन एक-एक को भारत का यादगार झण्डी या झण्डा लहराना चाहिए। ऐसे यह विशेष जन्म महारथियों का भी है, बाप का भी है। बापदादा का भी है। तो ऐसे दिन पर हर एक को क्या मनाना है? बापदादा का यह संकल्प है कि इस शिवरात्रि पर या एक सप्ताह पहले या एक सप्ताह पीछे इन दिनों में अपने परिचित, अपने मोहल्ले वाले, अपने दफ्तर के कार्य करने वाले साथी, इन्हों को सन्देश जरूर दो कि अगर बाप से वर्सा लेना है तो ले लो, यह सन्देश जरूर दे दो। आपके मोहल्ले में कोई ऐसा नहीं रहे जो कहे कि हमको अभी लास्ट में सन्देश क्यों दिया। थोड़ा पहले तो देते तो हम भी कुछ बना तो लेते, नहीं तो लास्ट में तो सिर्फ अहो प्रभू कहते रहेंगे। आप आये हमने नहीं पहचाना। उल्हना देते रहेंगे। तो इस शिवरात्रि पर किसी भी विधि से ऐसा प्रोग्राम आपस में बनाओ जो पहचान वालों को सन्देश मिल जाये। फिर रहा उन्हों की तकदीर। लेकिन आपने अपना कार्य पूरा किया। तो हर एक को ऐसे किसी भी रूप में उन्हों को सन्देश पहुंच जाए फिर जैसी नेचर, जैसा स्वभाव उसी प्रमाण अपने-अपने तरीके से सन्देश जरूर दो। बड़ा दिन है, खुशखबरी आपको सुनाते हैं। तो यह उल्हना निकल जाए। अभी भी प्रोग्राम करते हो तो क्या कहते हैं, ऐसे भी कहते हैं अभी भी, कि हमको तो अभी पता पड़ा है। आपने पहले क्यों नहीं किया? इसलिए बच्चों का, बापदादा का जन्म दिन है, जो पुराने हैं वह अपना जन्मदिन कौन सा मनाते हैं? शिवरात्रि मनाते हैं ना! तो इतनों के जन्म दिन पर यह सन्देश देने की मिठाई बांटों। ठीक है!बांटेंगे! हाथ उठाओ। कोई भी वंचित नहीं रहे, किसी भी विधि से, फंक्शन करो या पोस्ट द्वारा भेजो, लेकिन कोई रहे नहीं। किसी भी साधन से उनको सन्देश जरूर पहुंचाओ। वह आप आपस में राय कर तीन चार तरीके बनाओ। वर्ग वाले भी अपने सभी कनेक्शन वालों को शिवरात्रि के महत्व का सन्देश जरूर दें। पसन्द है? अच्छा।

गांव गांव में भी, जैसे गांव में रहने वाले ब्राह्मण तो बने ही हैं कोई न कोई, उनको अपने गांव में किसी भी रीति से चाहे पर्चा भेजो, चाहे सम्मुख जाओ लेकिन सन्देश जरूर दो। घर-घर में मालूम हो कि यह शिवरात्रि क्या है। इसमें देखेंगे कौन सा ज़ोन कितना नम्बर लेता है। हिसाब रखना। बापदादा रिजल्ट देखेंगे, कितनों को पर्चे बांटे, कितनों से प्रैक्टिकल मिले, सब रिजल्ट निकालना। हर एक को बिजी रहना है, कोई भी फ्री नहीं रहे। अच्छा। इन्दौर और राजस्थान। दोनों की विशेषता ब्रह्मा बाप के लाडले। ब्रह्मा बाप द्वारा इन्दौर का फाउण्डेशन पड़ा और राजस्थान में ब्रह्मा बाप या बापदादा द्वारा पहला म्यूजियम बना। तो दोनों ही ब्रह्मा बाबा के, बाप के तो हैं ही लेकिन विशेष ब्रह्मा बाप के लाडले हैं। तो ब्रह्मा बाप की छत्रछाया दोनों के ऊपर सदा रहती है। है तो सभी ज़ोन पर लेकिन इन्हों की विशेषता है। ब्रह्मा बाप जब सन्देशी जाती है और एडवांस पार्टी इमर्ज होती है तो उन्हों से यह पहली शुरू-शुरू की बातें बहुत रूहरिहान में करते हैं। आप सबके महारथी जो स्थापना के निमित्त बने हैं, वह बहुत साथी एडवांस पार्टी में निमित्त बने हैं तो उन्हों से बापदादा आदि की रूहरिहान बहुत करते हैं। और बापदादा और एडवांस पार्टी दोनों का एक ही संकल्प है कि अब कब गेट खोलने आयेंगे। क्योंकि अकेले एडवांस पार्टी भी खोल नहीं सकती, बापदादा भी खोल नहीं सकते, साथ खोलेंगे। तो पूछते हैं एडवांस पार्टी वाले और बापदादा भी कहते हैं कि आखिर भी सभी निराकारी फरिश्ते स्वरूप में कब एवररेडी होंगे! आजकल प्रकृति भी बहुत पुकारती है, बोझ बहुत बढ़ता जाता है। मन का भी, शरीरों का भी। इसलिए सभी आपका आवाह्न कर रहे हैं। अब थोडा-थोडा अपना एवररेडी का नज़ारा दिखाओ। वह नज़ारा है ज्यादा में ज्यादा समय या फरिश्ता रूप या निराकारी रूप, प्रैक्टिकल में प्रत्यक्ष करो अपना। गुप्त पुरूषार्थ करते हैं लेकिन अभी प्रत्यक्ष दिखाई दे, आपके मस्तक से लाइट का प्रकाश अनुभव हो। नयनों से रूहानियत की शक्ति अनुभव हो। मुख से, चेहरे से मधुरता, मुस्कुराता चेहरा अनुभव हो। तारीख पूछेंगे तो हर एक सोचेगा क्योंकि संगठन रूप में जो भी महावीर हैं, तीव्र पुरूषार्थी हैं उनको संगठन रूप में जाना है। आगे पीछे नहीं जाना है। पहले यहाँ एवररेडी का रूप प्रत्यक्ष होना है, जिससे प्रत्यक्षता हो बापदादा की, कार्य की। तो अभी तीव्र पुरूषार्थ करो, एक दो को सहयोग दो, आगे बढ़ाओ। कमज़ोर को सहारा दो। ऐसा संगठन बनाओ। अच्छा।

ग्राम विकास विंग, साइंस इंजीनियर विंग और स्पार्क:- अपना परिचय अच्छी तरह दे रहे हैं। अच्छा तीनों ही वर्ग का समाचार बापदादा ने सुना है। तो हर एक वर्ग जो भी आये हो उन्होंने आपस में अच्छी प्रगतिशील मीटिंग की है और मीटिंग में अपना-अपना आगे का प्लैन भी बनाया है। बापदादा खुश है कि आजकल वर्ग वाले सेवा में हर एक नम्बरवन लेना चाहते हैं। यह तीव्र पुरूषार्थ का उमंग उत्साह देख बापदादा सभी वर्गों को खास इन तीनों वर्गों को पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं। प्लैन अच्छे बनाये हैं। अच्छे बनाये हैं और उमंग का बनाया है। इसलिए बापदादा तीनों को कहते हैं जो प्लैन बनाये हैं वह अभी जल्दी से जल्दी प्रैक्टिकल में लाओ। बापदादा को पसन्द है। सिर्फ बीच-बीच में आजकल तो फोन सिस्टम भी है, आपस में कान्फ्रेन्स करने की। तो हर एक वर्ग का जो विशेष निमित्त है, वह बीच-बीच में फोन कान्फ्रेन्स करके भी उमंग उत्साह बढ़ाओ। क्योंकि अपने-अपने शहर में उमंग उत्साह दिलायेंगे तो जैसे मीटिंग में उमंग उत्साह आता है विशेष। ऐसे बीच-बीच में रिजल्ट पूछ उन्हों को भी उमंग में लाओ। अच्छा है। यह बोर्ड पब्लिक के तरफ करो। नेचर की भी आजकल सभी को चिंता है। तो आप विशेष सन्देश दो, मन की नेचर द्वारा प्रकृति की नेचर को कैसे सुधार सकते हैं। प्लैन बनाया है लेकिन अभी हर जगह मिलकर प्रोग्राम द्वारा एनाउन्स करो, छोटे-छोटे प्रोग्राम भी बनाओ लेकिन आवाज फैलाओ। अभी जो भी प्रोग्राम चल रहे हैं बापदादा ने देखा कि हर एक प्रोग्राम में आवाज फैलाने का तरीका बहुत अच्छा बनाया है और भी जो कर रहे हैं, उसमें सबके निमित्त बने हुए सेवाधारियों की राय लेकर और प्रोग्राम में चार चांद और लगाओ। जहाँ भी जायें विशेष या छोटे-छोटे स्थान में भी आवाज हो, ब्रह्माकुमारियां कुछ प्रोग्राम कर रही हैं। शान्ति में नहीं बैठो, अभी उमंग उत्साह से आवाज फैलाओ। अभी नजदीक आने का समय है। वायुमण्डल अभी वैराग्य वृत्ति का नवीनता देखने और सुनने का इच्छुक है। एक दो में राय कर और उत्साह उमंग का चारों ओर आवाज फैलाओ। मुख्य जो स्थान हैं, देश हैं उसमें वर्तमान समय इकठ्ठा सन्देश पहुंचे, हर मुख्य स्थान पर अखबारों में आवे, यह हुआ, यह हुआ… यह कर रहे हैं, यह कर रहे हैं… चाहे रेडियो, चाहे टी.वी. सब तरफ से आवाज फैलाओ। अपने-अपने एरिया में भी टी.वी. द्वारा रेडियो द्वारा आवाज फैला सकते हो। अच्छा। बहुत-बहुत मुबारक हो, वर्ग आजकल उत्साह में कर रहे हैं, और करते रहना। अच्छा।

सिंधी ग्रुप:- सिंधी ग्रुप वाले हाथ उठाओ। यह उमंग सेवा का तरीका बहुत अच्छा बना लिया है। बापदादा विशेष निमित्त बनने वाले उन्हों को मुबारक देते हैं क्योंकि इसी कारण सभी को सन्देश तो मिल गया। आये कितने भी लेकिन परिचय कितनों को मिला। और सभी औरों को भी यह आपका साधन अच्छा लगेगा। सेवा भी हो गई और मनाना भी हो गया। डबल काम हो गया और जो भी साथ में आये हैं उन्हों की दुआयें भी मिल जायेंगी। अच्छा है। बाप को, शिवबाबा को अपने अवतरण का स्थान कौन सा पसन्द आया? सिन्ध पसन्द आई ना! तो भाग्य है ना! अवतरण के स्थान का महत्व कितना होता है! जो भी धर्म पिता आये हैं उन्हों के जन्म स्थान का कितना यादगार रहता है। तो सिन्ध जन्म भूमि उसका भी बहुत महत्व है। अभी यह प्लैन बना रही है, जनक प्रोग्राम बना रही है, अभी आप भी अपने-अपने पहचान वाले को जो वहाँ बैठे हैं, अगर परिचय है तो उन्हों को समाचार सुनाओ कि अभी यह स्थान अपना स्थान लिया है। छोटे से बड़ा हो जायेगा। लेकिन बापदादा यह अटेन्शन दिलाते हैं कि जिस समय जाओ उस समय के वायुमण्डल को जानकर फिर कदम उठाना क्योंकि यह इन लोगों के बदलने में देरी नहीं लगती है। बाकी अच्छा है, जहाँ जन्म स्थान है वहाँ प्रत्यक्षता होनी ही चाहिए। चाहे कोई भी धर्म वाले हों लेकिन है तो एक ही बाप के बच्चे। बाप का सन्देश सुनने के लिए सभी का हक लगता है। तो बापदादा आपका यह प्लैन देखकर खुश है। सभी को जो भी आये हैं उन सबको बापदादा विशेष मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो।

डबल विदेशी- बापदादा ने देखा कि डबल विदेशी चांस लेने में बहुत होशियार हैं। कहाँ से भी पहुंच भी जाते और अपने सर्विस के प्लैन अच्छे-अच्छे बनाके संगठन भी अपना मजबूत कर लेते। स्थान बहुत अच्छा ढूंढा है। बाप से भी मिलना, परिवार से भी मिलना और अपनी प्रोग्रेस भी करना। यह बापदादा को पसन्द है। विदेशी ऐसा सैम्पुल बनके दिखाओ जो जिस देश में निमित्त हो उस देश में जो भी सेन्टर हो, जितने भी सेन्टर हो वह निर्विघ्न बनने का एक्जैम्पुल बनाके दिखाओ। नम्बर लो। इन्डिया के ज़ोन भी पुरूषार्थ कर रहे हैं, अभी एनाउन्स नहीं हुआ है लेकिन आप नम्बर ले लो। जो भी ले। हिम्मत अच्छी है और सहयोग भी अच्छा मिला हुआ है। बापदादा ने देखा कि जो बनाते हैं उसकी जो पैकिंग करते हैं, इन्डियन भाषा में कहा जाता है पीठ करते हैं। कनेक्शन जोड़के किसी भी साधन से कनेक्शन में आगे बढ़ाते हैं। अच्छा है। उमंग उत्साह की लहर फैलाते रहते हो और हर साल कुछ न कुछ विशेषता एड भी करते। इसलिए बापदादा पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं।

अभी इन्दौर क्या करेगा? कोई एक्जैम्पुल नम्बरवन बनाके दिखायेगा, चाहे इन्दौर करे चाहे राजस्थान करे, नम्बर ले लो। है हिम्मत। है ना हिम्मत? बापदादा को साथी तो बनाया ही है। तो बापदादा साथ है सिर्फ निमित्त बनना है। अच्छा।

बापदादा हर एक बच्चे की विशेषता को देख रहे हैं। हर एक बच्चे में किसी न किसी सबजेक्ट में विशेषता समाई हुई है इसलिए बापदादा इन्डिविज्युअल एक-एक बच्चे को होवनहार विजयी स्वरूप में देख रहे हैं क्योंकि सबको साथी बनके चलना है। साथ है, साथ चलेंगे। ब्रह्मा बाप के साथ में राज्य करेंगे। अच्छा।

चारों ओर के बच्चों को बापदादा देख देख खुश हो गीत गाते वाह बच्चे वाह! हर बच्चे के दिल में बाप है और बाप के दिल में हर बच्चा है। और यहाँ इतना परिवार मधुबन निवासी देखकर यह भी खुशी होती है वाह मधुबन वाह! सबका एशलम मधुबन है ही है इसलिए मधुबन में भागकर आ जाते हैं। अब बाप की जो आशा है वह जल्दी से जल्दी पूर्ण करना है। चार ही सबजेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनना ही है। बापदादा देश विदेश चारों ओर के बच्चे यहाँ बैठे देख रहे हैं। सभी कैसे देख देख हर्षित हो रहे हैं। यह साधन, यह साइंस इसी समय प्रोग्रेस में जा रही है, नई नई इन्वेन्शन दुनिया के हैं लेकिन आपके फायदे के साधन अच्छे अच्छे निकाल रहे हैं। दूर होते भी साथ हैं। तो साइंस वालों को भी मुबारक है जो साधन तो बनाये हैं। अच्छा। सभी बच्चों को देश विदेश के सभी बच्चों को बहुत-बहुत दिल का प्यार और याद स्वीकार हो और विशेष ऐसे विशेष बच्चों को नमस्ते।

दादियों से:- उमंग उत्साह भी अच्छा है और प्रबन्ध भी मिल रहा है। यह साधन आपके समय ही निकले हैं, आपको ही सुख मिल रहा है। वह विनाश की बातें ही करते और आप फायदा ले रहे हो। अच्छा है।

मोहिनी बहन मुम्बई हॉस्पिटल में हैं, उन्हों ने विशेष याद भेजी है:- अभी लग गई है ना ठीक करने में, तो ठीक करके ही आवे। याद तो आती है लेकिन तबियत को भी साथ चलाना है। बापदादा को भी याद कर रही है, बापदादा के पास पहुंच रहा है। उसको विशेष याद प्यार भी दे रहे हैं।

दीदी निर्मलशान्ता से:- आपकी हिम्मत शरीर को चला रही है। बाप मददगार है और आपकी हिम्मत है।

रतनमोहिनी दादी से:- उड़ा भी रहे हैं, उड़ भी रहे हैं।

शान्तामणि दादी से:- ठीक है, खुश है। दृष्टि ले रही है बहुत अच्छी।

तीनों भाईयों से:- तीनों ही मिलके शिवरात्रि का प्लैन बनाना। जो भी विशेष स्थान हैं उसमें एक ही समय एक ही जैसा अपना-अपना करें, लेकिन मुख्य स्थानों में एडवरटाइज करो। सभी स्थानो पर हो। क्योंकि मुख्य स्थान तो कहाँ न कहाँ प्रबन्ध करके कर सकते हैं जैसे एक ही समय बड़े प्रोग्राम किये ना ऐसे शिवरात्रि का प्रोग्राम जगह जगह पर हो और सभी तरफ का इकठ्ठा करके जैसे पहले दिखाया वैसे दिखाओ।

मद्रास का प्रोग्राम बहुत अच्छा हुआ है:- यह भी आपस में सेवा में कुछ एडीशन करना हो या नवीनता करनी हो तो आपस में मीटिंग करके उसको भी आगे बढ़ा सकते हो। निमित्त हैं, निमित्त बनके काम तो अच्छा कर रहे हो लेकिन फिर भी इसमें एडीशन करनी हो तो कर सकते हो।

निजार भाई से:- अच्छा मुबारक हो। प्रोग्राम तो अच्छा चल रहा है फिर भी आपस में राय करके अगर कुछ एडीशन करनी हो तो एडीशन भी करो, चलाते चलो। जो राय हो वह सुनो, अगर पसन्द आवे तो उसको बढ़ाओ। बाकी अच्छा है। मीटिंग में जो भी राय हो वह दो और बाकी फिर सभी मिलकर फाइनल करने के बाद फिर उसको करके देखो।

डायमण्ड हॉल में नई स्क्रीन लगाई गई है, जिसे बापदादा देख रहे हैं:- सभी खुशी में उड़ रहे हो, यही बापदादा देख रहे हैं कि सभी एक-एक उड़ रहे हैं।

Bapdada Milan Avyakt Murli – 30/11/19

31-10-07   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

‘‘अपने श्रेष्ठ स्वमान के फखुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो’’

आज बापदादा अपने चारों ओर के श्रेष्ठ स्वमानधारी विशेष बच्चों को देख रहे हैं। हर एक बच्चे का स्वमान इतना विशेष है जो विश्व में कोई भी आत्मा का नहीं है। आप सभी विश्व की आत्माओं के पूर्वज भी हो और पूज्य भी हो। सारे सृष्टि के वृक्ष की जड़ में आप आधारमूर्त हो। सारे विश्व के पूर्वज पहली रचना हो। बापदादा हर एक बच्चे की विशेषता को देख खुश होते हैं। चाहे छोटा बच्चा है, चाहे बुजुर्ग मातायें हैं, चाहे प्रवृत्ति वाले हैं। हर एक की अलग-अलग विशेषतायें हैं। आजकल कितने भी बड़े ते बड़े साइंसदान हैं, दुनिया के हिसाब से विशेष हैं लेकिन प्रकृतिजीत तो बनें, चन्द्रमां तक भी पहुंच गये लेकिन इतनी छोटी सी ज्योति स्वरूप आत्मा को नहीं पहचान सकते। और यहाँ छोटा सा बच्चा भी मैं आत्मा हूँ, ज्योति बिन्दु को जानता है। फलक से कहता है मैं आत्मा हूँ। कितने भी बड़े महात्मायें हैं और ब्राह्मण मातायें हैं, मातायें फलक से कहती हमने परमात्मा को पा लिया। पा लिया है ना! और महात्मायें क्या कहते? परमात्मा को पाना बहुत मुश्किल है। प्रवृत्ति वाले चैलेन्ज करते हैं कि हम सब प्रवृत्ति में रहते, साथ रहते पवित्र रहते हैं क्योंकि हमारे बीच में बाप है। इसलिए दोनों साथ रहते भी सहज पवित्र रह सकते हैं क्योंकि पवित्रता हमारा स्वधर्म है। पर धर्म मुश्किल होता है, स्व धर्म सहज होता है। और लोग क्या कहते? आग और कपूस साथ में रह नहीं सकते। बड़ा मुश्किल है और आप सब क्या कहते? बहुत सहज है। आप सबका शुरू शुरू का एक गीत था – कितने भी सेठ, स्वामी हैं लेकिन एक अल्फ को नहीं जाना है। छोटी सी बिन्दी आत्मा को नहीं जाना लेकिन आप सभी बच्चों ने जान लिया, पा लिया। इतने निश्चय और फखुर से बोलते हो, असम्भव सम्भव है। बापदादा भी हर एक बच्चे को विजयी रत्न देख हर्षित होते हैं क्योंकि हिम्मते बच्चे मददे बाप है। इसलिए दुनिया लिए जो असम्भव बातें हैं वह आपके लिए सहज और सम्भव हो गई हैं। फखुर रहता है कि हम परमात्मा के डायरेक्ट बच्चे हैं। इस नशे के कारण, निश्चय के कारण परमात्म बच्चे होने के कारण माया से भी बचे हुए हो। बच्चा बनना अर्थात् सहज बच जाना। तो बच्चे हो और सब विघ्नों से, समस्याओं से बचे हुए हो।

तो अपने इतने श्रेष्ठ स्वमान को जानते हो ना! क्यों सहज है? क्योंकि आप साइलेन्स की शक्ति द्वारा, परिवर्तन शक्ति को कार्य में लगाते हो। निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन कर लेते हो। माया कितने भी समस्या के रूप में आती है लेकिन आप परिवर्तन की शक्ति से, साइलेन्स की शक्ति से समस्या को समाधान स्वरूप बना देते हो। कारण को निवारण रूप में बदल देते हो। है ना इतनी ताकत, कोर्स भी कराते हो ना! निगेटिव को पॉजिटिव करने की विधि सिखाते हो। यह परिवर्तन शक्ति बाप द्वारा वर्से में मिली है। एक ही शक्ति नहीं, सर्वशक्तियां परमात्म वर्सा मिला है, इसीलिए बापदादा हर रोज कहते हैं, हर रोज मुरली सुनते हो ना! तो हर रोज बापदादा यही कहते- बाप को याद करो और वर्से को याद करो। बाप की याद भी सहज क्यों आती है? जब वर्से की प्राप्ति को याद करते तो बाप की याद प्राप्ति के कारण सहज आ जाती है। हर एक बच्चे को यह रूहानी फखुर रहता है,दिल में गीत गाते हैं – पाना था वो पा लिया। सभी के दिल में यह स्वत: ही गीत बजता है ना! फखुर है ना! जितना इस फखुर में रहेंगे तो फखुर की निशानी है, बेफिक्र होंगे। अगर किसी भी प्रकार का संकल्प में, बोल में या सम्बन्ध-सम्पर्क में फिकर रहता है तो फखुर नहीं है। बापदादा ने बेफिक्र बादशाह बनाया है। बोलो, बेफिक्र बादशाह हो? है, हाथ उठाओ जो बेफिकर बादशाह हैं? बेफिकर कि कभी कभी फिकर आ जाता है? अच्छा है। जब बाप बेफिक्र है, तो बच्चों को क्या फिकर है। बापदादा ने तो कह दिया है सब फिक्र वा किसी भी प्रकार का बोझ है तो बापदादा को दे दो। बाप सागर है ना। तो बोझ सारा समा जायेगा। कभी बापदादा बच्चों का एक गीत सुनके मुस्कराता है। पता है कौन सा गीत? क्या करें, कैसे करें…. कभी कभी तो गाते हो। बापदादा तो सुनता रहता है। लेकिन बापदादा सभी बच्चों को यही कहते हैं हे मीठे बच्चे, लाडले बच्चे साक्षी-दृष्टा के स्थिति की सीट पर सेट हो जाओ और सीट पर सेट होके खेल देखो, बहुत मजा आयेगा, वाह! त्रिकालदर्शी स्थिति में स्थित हो जाओ। सीट से नीचे आते इसलिए अपसेट होते हो। सेट रहो तो अपसेट नहीं होंगे।

यह तीन चीज़ें बच्चों को परेशान करती हैं। कौन सी तीन चीज़ें? – चंचल मन, भटकती बुद्धि और क्या कहते हैं? पुराने संस्कार। बापदादा को बच्चों की एक बात सुनके हंसी आती है, पता है कौन सी बात है? कहते हैं बाबा क्या करें, मेरे पुराने संस्कार हैं ना! बापदादा मुस्कराता है। जब कह ही रहे हो, मेरे संस्कार, तो मेरा बनाया है?तो मेरे पर तो अधिकार होता ही है। जब पुराने संस्कार को मेरा बना दिया, तो मेरा तो जगह लेगा ना। क्या यह ब्राह्मण आत्मा कह सकती है मेरे संस्कार? मेरा-मेरा कहा है तो मेरे ने अपनी जगह बना दी है। आप ब्राह्मण मेरा नहीं कह सकते। यह पास्ट जीवन के संस्कार हैं। शूद्र जीवन के संस्कार हैं। ब्राह्मण जीवन के नहीं है। तो मेरा-मेरा कहा है तो वह भी मेरे अधिकार से बैठ गये हैं। ब्राह्मण जीवन के श्रेष्ठ संस्कार जानते हो ना! और यह संस्कार जिनको आप पुराने कहते हो, वह भी पुराने नहीं हैं, आप श्रेष्ठ आत्माओं का पुराने ते पुराना संस्कार अनादि और आदि संस्कार है। यह तो द्वापर मध्य के संस्कार हैं। तो मध्य के संस्कार को समाप्त कर देना, बाप की मदद से कोई मुश्किल नहीं है। होता क्या है? कि समय पर बाप कम्बाइन्ड है,उसे कम्बाइन्ड जान, कम्बाइन्ड का अर्थ ही है समय पर सहयोगी। लेकिन समय पर सहयोग न लेने के कारण मध्य के संस्कार महान बन जाते हैं।

बापदादा जानते हैं कि सभी बच्चे बाप के प्यार के पात्र हैं, अधिकारी हैं। बाबा जानते हैं कि प्यार के कारण ही सभी पहुंच गये हैं। चाहे विदेश से आये हैं, चाहे देश से आये हैं, लेकिन सभी परमात्म प्यार की आकर्षण से अपने घर में पहुंचे हैं। बापदादा भी जानते हैं प्यार में मैजॉरिटी पास हैं। विदेश से प्यार के प्लेन में पहुंच गये हो। बोलो, सभी प्यार की डोर में बंधे हुए यहाँ पहुंच गये हो ना! यह परमात्म प्यार दिल को आराम देने वाला है। अच्छा – जो पहली बार यहाँ पहुचे हैं वह हाथ उठाओ। हाथ हिलाओ। भले पधारे। अभी बापदादा ने होम वर्क दिया था, याद है होमवर्क? याद है? बापदादा के पास कई तरफ से रिजल्ट आई है। लेकिन अभी क्या करना है? सभी की रिजल्ट नहीं आई है। कोई की कितने परसेन्ट में भी आई है। बापदादा क्या चाहते हैं? बापदादा यही चाहते हैं कि सब पूज्यनीय आत्माये हैं। तो पूज्यनीय आत्माओं का विशेष लक्षण दुआ देना ही है। तो आप सभी जानते हो कि आप सभी पूज्यनीय आत्मायें है, तो यह दुआ देना, दुआ देना अर्थात् दुआ लेना अण्डरस्टुड हो जाता है। जो दुआ देता है, जिसको देते हैं उसकी दिल से बार-बार देने वाले के लिए दुआ निकलती है। तो पूज्य आत्मायें आपका तो निजी संस्कार है – दुआ देना। अनादि संस्कार है दुआ देना। जब आपके जड़ चित्र भी दुआ दे रहे हैं तो आप चैतन्य पूज्य आत्मायें दुआ देना यह तो नेचुरल संस्कार है। इसको कहो मेरा संस्कार। मध्य द्वापर के संस्कार नेचुरल हो गया है। नेचर हो गया है। वास्तव में यह संस्कार दुआ देने का नेचुरल नेचर है। जब किसी को दुआ देते हैं, तो वह आत्मा कितनी खुश होती है, वह खुशी का वायुमण्डल कितना सुखदाई होता है! तो जिन्होंने भी किया है उन सबको, चाहे आये हैं, चाहे नहीं आये हैं, लेकिन बापदादा के सामने हैं। तो उन्हों को बापदादा मुबारक दे रहे हैं। किया है और अपनी नेचुरल नेचर बनाते हुए आगे भी करते, कराते रहना। और जिन्होंने थोड़ा बहुत किया भी है, नहीं भी किया है तो वह सभी अपने को सदा मैं पूज्य आत्मा हूँ, मैं बाप की श्रीमत पर चलने वाली विशेष आत्मा हूँ, इस स्मृति को बार-बार अपनी स्मृति और स्वरूप में लाना क्योंकि हर एक से जब पूछते हैं कि आप क्या बनने वाले हो? तो सब कहते हैं हम लक्ष्मी-नारायण बनने वाले हैं। राम-सीता में कोई नहीं हाथ उठाता। जब लक्ष्य है, 16 कला बनने का। तो 16 कला अर्थात् परमपूज्य, पूज्य आतमा का कर्तव्य ही है दुआ देना। यह संस्कार चलते फिरते सहज और सदा के लिए बनाओ। हो ही पूज्य। हो ही 16 कला। लक्ष्य तो यही है ना!

बापदादा खुश है कि जिन्होंने भी किया है, उन्होंने अपने मस्तक में विजय का तिलक बाप द्वारा लगा दिया। साथ में सेवा के समाचार भी बापदादा के पास सबकी तरफ से, वर्गो की तरफ से, सेन्टर्स की तरफ से बहुत अच्छी रिजल्ट सहित पहुंच गये हैं। तो एक होमवर्क करने की मुबारक और साथ में सेवा की भी मुबारक। पदम-पदमगुणा है। बाप ने देखा कि गांव-गांव में सन्देश देने की सेवा बहुत अच्छे तरीके से मैजॉरिटी एरिया में की है, तो यह सेवा भी रहमदिल बनकर सेवा के उमंग-उत्साह में रिजल्ट भी अच्छी दिखाई दी है। जिन्होंने भी मेहनत नहीं, लेकिन बाप से प्यार अर्थात् सन्देश देने से प्यार, तो प्यार के मुहब्बत में सेवा की है तो बाप की भी पदम पदमगुणा प्यार का रिटर्न सब सेवाधारियों को स्वत: ही प्राप्त है, होगा। साथ में सभी ने अपनी प्यारी दादी को बहुत स्नेह से याद करते हुए, दादी को प्यार का रिटर्न दे रहे हैं, यह प्यार की खुशबू बापदादा के पास बहुत अच्छी तरह से पहुंच गई है। और अभी भी जो भी मधुबन में कार्य चल रहे हैं, चाहे विदेशियों के, चाहे भारत के वह सब कार्य भी एक दो के सहयोग, सम्मान के आधार से बहुत अच्छे सफल हुए हैं और आगे भी होने वाले कार्य सफल हुए पड़े हैं क्योंकि सफलता तो आपके गले का हार है। बाप के गले के भी हार हो, बाप ने याद दिलाया था कि कभी भी हार खाना नहीं क्योंकि आप बाप के गले के हार हो। तो गले का हार कभी हार नहीं खा सकता। तो हार बनना है या हार खानी है? नहीं ना! हार बनना अच्छा है ना! तो हार कभी नहीं खाना। हार खाने वाले तो अनेक करोड़ों आत्मायें हैं,आप हार बनके गले में पिरोये गये हो। ऐसे है ना! तो संकल्प करो बाप के प्यार में कितना भी माया तूफान सामने लाये लेकिन मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं के आगे तूफान भी तोहफा बन जायेगा। ऐसा वरदान सदा याद करो। कितना भी ऊंचा पहाड़ हो, पहाड़ बदल के रूई बन जायेगा। अभी समय की समीपता प्रमाण वरदानों को हर समय अनुभव में लाओ। अनुभव की अथॉरिटी बनो। जब चाहो तब अपने अशरीरी बनने की, फरिश्ता स्वरूप बनने की एक्सरसाइज करते रहो। अभी-अभी ब्राह्मण, अभी-अभी फरिश्ता, अभी-अभी अशरीरी, चलते फिरते, कामकाज करते हुए भी एक मिनट, दो मिनट निकाल अभ्यास करो। चेक करो जो संकल्प किया, वही स्वरूप अनुभव किया? अच्छा।

चारों ओर के सदा श्रेष्ठ स्वमानधारी, सदा स्वयं को परमपूज्य और पूर्वज अनुभव करने वाले,सदा अपने को हर सबजेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनाने वाले, सदा बाप के दिलतख्त नशीन,भृकुटी के तख्तनशीन, सदा श्रेष्ठ स्थिति के अनुभवों में स्थित रहने वाले, चारों ओर के सभी बच्चों को यादप्यार और नमस्ते।

सभी तरफ से सभी के पत्र, ईमेल, समाचार सभी बापदादा के पास पहुंच गये हैं, तो सेवा का फल और बल, सभी सेवाधारियों को प्राप्त है और होता रहेगा। प्यार के पत्र भी बहुत आते हैं, परिवर्तन के पत्र भी बहुत आते हैं। परिवर्तन की शक्ति वालों को बापदादा अमर भव का वरदान दे रहे हैं। सेवाधारियों को जिन्होंने बहुत श्रीमत को फॉलो किया है, ऐसे फॉलो करने वाले बच्चों को बापदादा सदा फरमानबरदार बच्चे वाह! यह वरदान दे रहे हैं और प्यार वालों को बहुत-बहुत प्यार से दिल में समाने वाले अति प्यारे और अति माया के विघ्नों से न्यारे ऐसा वरदान दे रहे हैं। अच्छा।

सेवा का टर्न कर्नाटक जोन का है:- सभी के हाथ में झण्डे झण्डियां हैं, सभी झण्डियों तो बहुत अच्छी हिला रहे हैं, अच्छा है। कर्नाटक वालो ने प्रोग्राम भी बहुत अच्छा स्वार्णिम कर्नाटक ऐसा किया है ना। तो यह प्रोग्राम भी बापदादा ने भिन्न-भिन्न स्थानों का देखा भी है, सुना भी है और मैजारिटी ने अच्छे उमंग-उत्साह से गांव-गांव में बापदादा का सन्देश पहुंचाया है। इसीलिए बापदादा कर्नाटक के सेवाधारियों को बहुत-बहुत सेवा की और श्रीमत के पालन करने की मुबारक दे रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा है, सेवा का जो चांस लिया है वह भी सभी सन्तुष्ट है और सन्तुष्ट किया है, इससे अपने जमा का खाता बहुत अच्छा जमा किया है। कर्नाटक की संख्या भी कम नहीं है, संख्या अच्छी है और जैसे अभी संगठित रूप में मिलकर निर्विघ्न सेवा का रिकार्ड दिखाया है, ऐसे ही आगे भी कर्नाटक संगठित रूप में बहुत कुछ कमाल कर सकते हैं। बापदादा के पास नक्शा है, कमाल कर सकते हैं। इसलिए संगठित रूप का जलवा दिखाना। अभी अच्छा किया है। सारा परिवार कर्नाटक पर खुश है। अच्छा – बापदादा ने कर्नाटक वालों को काम दिया था, याद है। क्या दिया था! वारिस क्वालिटी निकाले के लिए, याद है? सेवा में तो नम्बर लिया अच्छा, अभी इतने वारिस निकालो जो नम्बरवन आ जाओ। जो निमित्त हैं वह तो हैं, नये नये निकालो। तो बापदादा सभी बच्चों को देख खुश है। आप भी खुश है, बाप भी खुश है। जितना आप बाप को देखकर खुश होते हैं, उससे ज्यादा बच्चों को देख बाप खुश होते हैं। (कर्नाटक ने शुरू से अच्छे अच्छे वारिस निकाले हैं) अभी और भी निकालेंगे। ह्दयपुष्पा को रिटर्न तो देंगे ना। एडवांस पार्टी में वह भी वतन में इमर्ज होती है ना तो सब समाचार सुनते हैं। उसने अच्छे अच्छे वारिस निकाले हैं। लेकिन नम्बरवन वारिस निकालने में अभी नम्बरवन। पहले के तो हैं ही, है ना हिम्मत। टीचर्स हिम्मत है? हाथ उठाओ, हिम्मत है? सभी में हिम्मत है, बहुत हिम्मत है। तो बाप की भी बहुत-बहुत मदद है। अच्छा है। सेवा भी अच्छी की है, फर्स्ट टर्न मिला है। फर्स्ट टर्न में सब बात में फास्ट,तीव्र पुरूषार्थ। अच्छा – सबने बहुत दिल से सेवा की ना। थकावट तो नहीं हुई? थके नहीं ना! अथक बनके सेवा की। अच्छा।

डबल विदेशी, 60 देशों से 600 आये हैं:- अभी बापदादा ने देखा है कि विदेश में भी सेवा का उमंग अच्छा बढ़ रहा है। पहले कहते थे विदेश में स्टूडेन्ट बनना बड़ा मुश्किल है और अभी क्या है? अभी मुश्किल है या सहज है? सहज है? और बापदादा को बहुत अच्छा लगा कि आपस में मिलकर निर्विघ्न बनाने का प्लैन बनाया है और निर्विघ्न बनाने का प्लैन बहुत विधि पूर्वक निर्विघ्न बनाया है। इसकी बहुत-बहुत मुबारक हो, पदमगुणा मुबारक हो। जो भी प्रोग्राम किये हैं वह बहुत सफल रहे हैं। तो सदा सफलता की मुबारक है और सदा मुबारक पात्र रहेंगे। बापदादा को सेवा का प्रत्यक्ष फल देख करके भी खुशी है। यह काल आफ टाइम के आये हैं ना! हाथ उठाओ जो काल आफ टाइम में आये हैं। अच्छा। बहुत अच्छा किया। बहुत चतुर हैं। पहले ही आ गये हैं। अच्छा किया, बाप को भी बहुत प्यारे हो। और आपका भी बाप से प्यार है इसीलिए पहुंच गये हो। तो सभी ब्राह्मण परिवार की तरफ से, बाप की तरफ से भी आप एक एक को पदमगुणा मुबारक है, मुबारक है,मुबारक है। अच्छा है यह सभी बहुत अच्छे फॉरेन सेवा के लिए माइक और बच्चे दोनों पार्ट बजायेंगे। बच्चों का भी पार्ट बजायेंगे और माइक और लाइट बनके सेवा में और वृद्धि को प्राप्त करायेंगे। तो सभी ब्राह्मणों की तरफ से, बाप की तरफ से आप सबको मुबारक हो। अच्छा है। इस ईश्वरीय नॉलेज की प्रोपोगण्डा अब विदेश में भी निमित्त बनके कर रहे हो। अभी वहाँ भी आवाज फैल रहा है, अच्छी तरह से फैल रहा है और ड्रामानुसार आप सबकी और बाप की प्यारी दादी के निमित्त भी चारों ओर ब्राह्मण परिवार का बाप का नाम अच्छा प्रत्यक्ष हो गया है। दादी ने नाम प्रत्यक्ष किया, नाम और काम दो चीज़ होती हैं तो दादी ने नाम बहुत अच्छा फैलाया, अभी उन आत्माओं को अपना बनाना यह काम आपका है।

बापदादा ने देखा कि जैसे अभी हर साल वृद्धि करके बाप के सामने ला रहे हो, ऐसे आगे भी ज्यादा से ज्यादा वृद्धि करते रहेंगे। बाप और अपनी प्रत्यक्षता करते रहेंगे। अच्छा ग्रुप है। सभी निश्चयबुद्धि और ईश्वरीय नशे में रहने वाले, उड़ने वाले हैं। चलने वाले नहीं बनना, उड़ने वाले। चलने वाले समय पर नहीं पहुंच सकेंगे, उड़ने वाले बनना। डबल लाइट। बाकी बापदादा खुश है। जो किया वह सफल हो गया। तो आप सब कौन हुए? सफलता के सितारे। अच्छा है। बहुत अच्छा।

पोलीटिशियन, महिला और सिक्युरिटी तीन विंग आई हैं:- देखों कितने उमंग-उत्साह से सभी विंग सेवा कर रहे हैं। तीनों की रिजल्ट अच्छी है। गवर्मेन्ट में भी आवाज अच्छा फैल रहा है। तो सेवा की है तभी आवाज फैल रहा है। तो आपके वर्ग ने अच्छे प्लैन बनाके बाप की प्रत्यक्षता का झण्डा अच्छा फैला रहे हैं। पहले तो कोई मुश्किल से आता था और अभी खुद कहते हैं हम भी आने चाहते हैं। फर्क हो गया ना। अभी खुद ही कहते हैं कि आपके यहाँ कार्य बहुत अच्छा सफल होता है। तो अभी आंख खुलने शुरू हो गई है। धीरे-धीरे आंख खुल जायेगी। वैसे सभी वर्ग अपने अपने वर्ग में सेवा अच्छी कर रहे हैं। महिला वर्ग भी कर रहा है,सिक्युरिटी वर्ग भी कर रहा है, पोलीटिशन भी कर रहा है। लेकिन बापदादा ने देखा है कि दिनप्रतिदिन वर्गो के प्रमाण सेवा करने का उमंग अच्छा बढ़ रहा है। लोगों को रोकना पड़ता है,नहीं आओ। पहले आने के लिए मेहनत करनी पड़ती थी अभी संख्या से ज्यादा आ जाते हैं। क्वान्टिटी और क्वालिटी दोनों ही आ रहे हैं। लेकिन क्वालिटी भी आने शुरू हो गई है इसीलिए तीनों ही वर्गो के सेवाधारियों को बापदादा की तरफ से और ब्राह्मण परिवार की तरफ से मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। और आपकी दादी ने तो सभी वर्गो में सेवा की वृद्धि का कलम लगा दिया है। दादी भी आप सभी को बहुत याद देती है। उसका भी मन संगम पर है और तन एडवांस पार्टी की तरफ है। अच्छा है। ट्रेनिंग की टीचर्स और इन्दौर,

नडियाद होस्टल की कुमारियां:- (बाबा ही हमारा संसार है यह बैनर दिखा रहे हैं) अच्छा है स्लोगन तो बहुत अच्छा लिखा है, ऐसा ही रोज अमृतवेले यह स्लोगन याद करना, सभी कुमारियां चाहे इन्दौर की हैं, चाहे मधुबन की ट्रेनिंग की है चाहे नड़ियाद की हैं लेकिन सभी कुमारियां अमृतवेले से यह स्लोगन याद करना है क्योंकि बाबा ही हमारा संसार है। तो सारी आकर्षण, सारा दिल का प्यार कहाँ जायेगा? बाबा में। नयनों में सदा कौन दिखाई देगा?बाबा। मुख में सदा क्या निकलेगा? बाबा। और चेहरे में सदा बाप का नशा दिखाई देगा। सम्बन्ध-सम्पर्क में सदा ही बाप से सर्व सम्बन्ध जुटे रहेंगे। तो क्या हो जायेंगे? नो प्राब्लम। दादी के दो अक्षर याद है। दादी बार बार कहती है निर्विघ्न और निर्विकल्प। तो दादी से प्यार है ना,सभी कुमारियों का प्यार है दादी से। बहुत प्यार है। तो जो प्यारा होता है ना, उनके बोल, उनके शब्द सदा कानों में गूंजते रहते हैं। तो सदा यह बुद्धि में कानों में आवाज आता रहे निर्विघ्न और निर्विकल्प बनना ही है। बनेंगी ना। बनेंगी, बनेंगी, जरूर बनेंगी। क्योंकि बापदादा का कुमारियों के तरफ बहुत अटेन्शन है और कुमारियां लकी भी हैं। भाई, पाण्डव सेना जो हैं ना, वह हंसती है, कहते हैं कुमारियां तो जल्दी दादी बन जाती हैं। और पाण्डव को दादा नहीं कहते हैं। भाई कहते हैं। तो देखो आपका लक कितना बढ़िया है। आते ही लक प्राप्त हो जाता है। बापदादा का, गुरू का तख्त मिल जाता है। यह मुरली का तख्त गुरू का तख्त है। इसीलिए बापदादा टीचर्स को गुरूभाई कहता है। तो याद रखना गुरूभाई हैं। गुरू का तख्त मिला है। अच्छा है। यह ट्रेनिंग की जो विधि रखी है उससे अच्छी रिजल्ट निकलेगी। लेकिन आप सभी आपेही अपना चार्ट मधुबन में भेजते रहना। सिर्फ ओ.के. लिखना ज्यादा नहीं लिखना। अगर और कोई कारण हो या कुछ न कुछ कमज़ोरी हो तो ओ.के. के बीच में लाइन लगा देना। बाकी ज्यादा नहीं पत्र लिखना, बस। अच्छा है। टीचर्स भी अच्छी मेहनत कर रही हैं। बापदादा तो देखते हैं कि किसी भी डिपार्टमेंट के लिए मेहनत नहीं कर रहे हैं, अभी यह नहीं है, मेहनत सब कर रहे हैं। चाहे स्थूल सेवा वाले भी मेहनत बहुत कर रहे हैं। अभी एक बात चाहिए सुनाये क्या? एक बात जैसे सेवा में, कार्य में हर डिपार्टमेंट, हर वर्ग, हर सेन्टर, हर जोन, सेवा बढ़ा रहा है। लेकिन अभी आवश्यकता है – एकता और एकानामी की। यह दो चीज़ें, सम्मान देना और सम्मान लेना। तो एकता, हर एक के सहयोग की अंगुली है ही है। चाहे महारथी हैं, चाहे थोड़ा कम पुरूषार्थी हैं, लेकिन हर एक का सहयोग तो है। अगर कर्मणा करने वाले का सहयोग नहीं मिलता तो आप सेवा कैसे करते,टाइम पर कैसे निकलते, टाइम पर कैसे सेवा करते। ठीक है ना। हर एक विशेष है। सम्मान के अधिकारी हैं इसीलिए हरेक छोटे बड़े को सम्मान दो और सम्मान लो। दो अक्षर याद रखना – एकता और एकॉनामी। बाकी सब अच्छा है। (ट्रेनिंग कराने वाली टीचर्स) बहुत अच्छा, उमंग उल्हास में लाया, इसकी मुबारक हो। अच्छा। बापदादा तो एक-एक को देखकर,एक-एक की विशेषता को देखकर बहुत खुश होते हैं।

कर्नाटक की माताओं से:- मातायें ठीक हैं? मातायें हाथ उठाओ। बहुत हैं। कर्नाटक की मातायें उठो। अच्छा है, माताओं की संख्या तो अच्छी है। अभी कर्नाटक की मातायें क्या कमाल दिखायेंगी? कोई नई कमाल दिखाना। सेवा तो करती हो लेकिन अभी कोई नई मातायें अपनी चलन दिखाना और बापदादा का वरदान है माताओं को, कि जहाँ सेन्टर पर मातायें ज्यादा होती हैं, सेन्टर पर सेवा करती हैं, वहाँ भण्डारा और भण्डारी दोनों बहुत भरपूर रहती हैं। चाहे कमाती नहीं हैं लेकिन दिल बड़ी है। तो माताओं की महिमा बापदादा भी करते हैं, आदि से शुरूआत से, जब सेवाकेन्द्र खुले तो जहाँ मातायें रही हैं वहाँ कभी भी न भण्डारा खाली रहा है, न भण्डारी खाली रही है। इसीलिए मातायें पालन करने वाली है ना! तो नई नई आत्माओं की पालना बहुत अच्छी होती है। अच्छा।

कर्नाटक के पाण्डव:- अच्छा, हर सेन्टर पर पाण्डवों की भी आवश्यकता है क्योंकि पाण्डव आलराउण्ड सेवा में मददगार बनते हैं। चाहे हार्ड वर्कर में चाहे बाहर अन्दर सन्देश फैलाने में पाण्डव अच्छे मददगार बनते हैं और पाण्डव सेन्टर को चलाने और आगे बढ़ाने के लिए भी निमित्त बनते हैं। पाण्डव भी कम नहीं हैं। इसीलिए आपको याद है, पाण्डव और शक्तियां दोनों की आवश्यकता है इसका चतुर्भुज रूप दिखाया गया है। चतुर्भुज रूप में एक नहीं है, दोनों साथ हैं। मातायें पाण्डवों से आगे हैं, और पाण्डव माताओं से आगे हैं। तो अच्छा है कर्नाटक में पाण्डवों की भी कमी नहीं हैं, माताओं की भी कमी नहीं हैं और अच्छे-अच्छे जैसे जनक बच्ची ने कहा ना, तो कर्नाटक में बहुत वारिस पहले-पहले निकले हैं, यह राइट है। अभी उन्हों को ऐसे वारिस तैयार करने हैं, ठीक है ना। उमंग है ना। तो दूसरे वर्ष रिजल्ट तो बतायेंगे ना, कितने वारिस निकले। रिजल्ट बताना फिर बापदादा बुलायेगा। पहले रिजल्ट देखेगा। वर्ग वाले भी पहले लिस्ट निकालो,फॉरेन वाले भी ऐसे, नये नये वारिस निकालो, उसकी लिस्ट अगले वर्ष में ले आना फिर बापदादा बुलायेगा।

ठीक है, टीचर्स। टीचर्स सभी उठो:- टीचर्स भी कम नहीं हैं। बापदादा तो सभी टीचर्स को गुरूभाई देखते हैं। गुरूभाई का अर्थ है बाप समान। तो टीचर्स को विशेष हर कर्म बाप समान करना ही है। करेंगे नहीं, करना ही है क्योंकि टीचर्स बाप की तरफ से स्टूडेन्ट के आगे एक निमित्त साकार रूप में बाप समान हैं। टीचर का हर कर्म स्टूडेन्ट के आगे बाप समान दिखाई दे। सबके मुख से निकले यह तो बाप को फॉलो कर बाप समान बने हुए हैं। तो ऐसा लक्ष्य है ना। यही लक्ष्य है ना। कांध हिलाओ। टीचर निमित्त हैं। तो निमित्त के ऊपर जिम्मेवारी भी है ना। तो कर रही हो। लेकिन

और भी आगे करना है। लक्ष्य बहुत अच्छा है। और बाप तो यही हर टीचर में शुभ भावना रखते हैं कि बाप समान बनना ही है। और क्या करेंगी? और कोई रास्ता है क्या, समान बाप के बनने के और कोई रास्ता नहीं है इसीलिए देखो इन्होंने यह स्लोगन बनाया है, बाप ही संसार है। अच्छा बनाया है। लेकिन कपड़े पर नहीं रह जाये, दिल में रह जाए। अच्छी हैं टीचर्स। संगठन तो बहुत बढ़िया है। अभी कमाल करेंगी। जैसे अभी कमाल करके दिखाई ना। स्वार्णिम कनार्टक का अच्छा जलवा दिखाया अच्छा, ऐसे आगे भी कमाल दिखायेंगी। बाप की शुभ भावना है। ठीक है। अच्छा। अभी सबके दिल में क्या उमंग आ रहा है? एक ही उमंग बाप समान बनना ही है। है यह उमंग? पाण्डव, हाथ उठाओ। बनना ही है। बनेंगे, गे गे नहीं करना। देखेंगे, बनेंगे, गे गे नहीं करना… लेकिन बनना ही है। पक्का। पक्का? अच्छा। हर एक अपना ओ.के. का कार्ड अपने टीचर के पास चार्ट के रूप में देते रहना। ज्यादा नहीं लिखो, बस एक कार्ड ले लो उसमें ओ.के. लिखो या लाइन डालो बस। यह तो कर सकते हो ना। लम्बा पत्र नहीं। अच्छा।

दादियों से:- (जानकी दादी ने बापदादा को गले लगाया) सभी आपस में हाथ मिलाओ। बहुत अच्छा। (परदादी कलकत्ता जा रही है) कलकत्ते में चक्कर लगाने जा रही है। चक्कर लगाने जाना चाहिए। आप सभी भी सभी को हिम्मत,उमंग उत्साह दिलाने के निमित्त बन यही सेवा करते रहते हो ना! क्योंकि आज हिम्मत और उमंग उत्साह सदा कायम रहे, इसी की आवश्यकता है। तो सभी को जो भी सामने आये, उसको हिम्मत उमंग उत्साह सेकेण्ड की दृष्टि से भी प्राप्त हो। क्योंकि आप सभी मास्टर दाता हो। जो भी आवे, कुछ ले जावे। चाहे स्नेह ले जाये, चाहे सहयोग ले जाये। चाहे हिम्मत ले जाये। चाहे उमंग ले जाये, कुछ न कुछ ले जावे क्योंकि दाता के बच्चे हैं। वैसे तो सभी का काम यह है, कभी भी किससे मिलते हो, कोई मिलने आता है, खाली हाथ नहीं जाये। चलो दृष्टि का स्नेह ले जाये, टाइम नहीं है, बात करने की आवश्यकता भी नहीं रहती है, लेकिन जो आया वह गया कैसे? कुछ ले गया। सेकण्ड की दृष्टि से भी बहुत कुछ ले सकते हैं। दृष्टि की रूहानियत वा दृष्टि से दिल का स्नेह तो सेकण्ड में भी ले सकते हैं। अभी ब्राह्मणों का आपस में मिलना यह होना चाहिए। तभी आपका वायुमण्डल विश्व में स्नेह, सहयोग, हिम्मत फैलायेगा। सभी ब्राह्मण जो अपने को ब्रह्माकुमार कुमारी समझते हैं, उनको ऐसे ही सेवा में बिजी रहना है। ऐसे नहीं टाइम नहीं मिला, सेकण्ड तो मिला ना। मिनट भी मिला ना। गाया हुआ है नज़र से निहाल। तो ऐसे संगठन में लहर फैलाओ फिर टाइम देने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। अच्छा।

डबल विदेशी टीचर्स बहनों से:- आप सबने आपस में मिलकर अच्छा पार्ट बजाया। सब प्रोग्राम अच्छे ते अच्छे रहे। ऐसे ही सदा एक दो को सम्मान देते हुए, सहयोग देते हुए कार्य को सफल कर सकते हो। सफलता का तो वरदान है ही। निमित्त बनने वालों को तो विशेष बापदादा की तरफ से एकस्ट्रा सहयोग मिलता है। तो हर एक ने अपना-अपना अच्छा पार्ट बजाया। बापदादा खुश है। अपना कार्य पूरा किया तो अभी रहो या जाओ आपके ऊपर है। जिसकी ड्युटी होगी वह तो रूकेगी। बाकी अच्छी हिम्मत की और ड्रामानुसार आप लोग ही निमित्त बने हुए हो क्योंकि कन्ट्रोलिंग पावर है आपमें, चला सकती हो। अच्छा है, बापदादा खुश है।

Avyakt Murli Baba Milan – 17 October 2019

17-03-2007   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र करो, दुआ दो और दुआ लो”

आज प्यार और शक्ति के सागर बापदादा अपने स्नेही, सिकीलधे, लाडले बच्चो से मिलने के लिए आये है । सभी बच्चे भी दूर-दूर से स्नेह की आकर्षण से मिलन मनाने के लिए पहुंच गये है । चाहे सम्मुख बैठे है, चाहे देश विदेश मे बैठे हुए स्नेह का मिलन मना रहे है । बापदादा चारो ओर के सर्व स्नेही, सर्व सहयोगी साथी बच्चो को देख हर्षित होते हैं । बापदादा देख रहे हैं मैजॉरिटी बच्चो के दिल में एक ही संकल्प है कि अभी जल्दी से जल्दी बाप को प्रत्यक्ष करें । बाप कहते है सभी बच्चो का उमंग बहुत अच्छा है, लेकिन बाप को प्रत्यक्ष तब कर सकेंगे जब पहले अपने को बाप समान सम्पन्न सम्पूर्ण प्रत्यक्ष करेंगे । तो बच्चे पूछते है बाप से कि कब प्रत्यक्ष होगा? और बाप बच्चों से पूछते है कि आप बताओ, आप कब स्वयं को बाप समान प्रत्यक्ष करेंगे ? अपने सम्पन्न बनने की डेट फिक्स की है ? फ़ोरिन वाले तो कहते है एक साल पहले डेट फिक्स की जाती है । तो अपने को बाप समान बनने की आपस मे मीटिंग करके डेट फिक्स की है?

बापदादा देखते हैं आजकल तो हर वर्गकी भी मीटिंग्स बहुत होती है । डबल फारेनर्स की भी मीटिंग बापदादा ने सुनी । बहुत अच्छी लगी । सब मीटिंग्स बापदादा के पास तो पहुच ही जाती हैं । तो बापदादा पूछते है कि इसकी डेट कब फिक्स की है ? क्या यह डेट ड़ामा फिक्स करेगा या आप फिक्स करेंगे ? कौन करेगा ? लक्ष्य तो आपको रखना ही पड़ेगा । और लक्ष्य बहुत अच्छे ते अच्छा, बढिये ते बढिया रखा भी है, अभी सिर्फ जैसा लक्ष्य रखा है उसी प्रमाण लक्षण, श्रेष्ठ लक्ष्य के समान बनाना है । अभी लक्ष्य और लक्षण मे अन्तर है । जब लक्ष्य और लक्षण समान हो जायेंगे तो लक्ष्य प्रैक्टिकल में आ जायेगा । सभी बच्चे जब अमृतवेले मिलन मनाते है और संकल्प करते है तो वह बहुत अच्छे करते है । बापदादा चारो ओर के हर बच्चे की रूहरिहान सुनते है । बहुत सुन्दर बाते करते है । पुरुषार्थ भी बहुत अच्छा करते है लेकिन पुरुषार्थ में एक बात की तीव्रता चाहिए । पुरुषार्थ है लेकिन तीव्र पुरुषार्थ चाहिए । तीव्रता की दृढ़ता उसकी एडीशन चाहिए ।

बापदादा की हर बच्चे के प्रति यही आश है कि समय प्रमाण हर एक तीव पुरुषार्थी बने । चाहे नम्बरवार है, बापदादा जानते है लेकिन नम्बरवार मे भी तीव्र पुरुषार्थ सदा रहे, उसकी आवश्यकता है । समय सम्पन्न होने मे तीव्रता से चल रहा है लेकिन अभी बच्चो को बाप समान बनना ही है, यह भी निश्चित ही है सिर्फ इस में तीव्रता चाहिए । हर एक अपने को चेक करे कि मै सदा तीव्र पुरुषार्थी हूँ?  क्योंकि पुरुषार्थ मे पेपर तो बहुत आते ही हैं और आने ही है लेकिन तीव्र पुरुषार्थी के लिए पेपर मे पास होना इतना ही निश्चित है कि तीव्र पुरुषार्थी पेपर मे पास हुआ ही पडा है । होना है नही, हुआ ही पड़ा है, यह निश्चित है । सेवा भी सभी अच्छी रूचि से कर रहे है लेकिन बापदादा ने पहले भी कहा है कि वर्तमान समय के प्रमाण एक ही समय पर मन्सा-वाचा और कर्मणा अर्थात् चलन और चेहरे द्वारा तीनो ही प्रकार की सेवा चाहिए । मन्सा द्वारा अनुभव कराना, वाणी द्वारा ज्ञान के खजाने का परिचय कराना और चलन वा चेहरे द्वारा समूर्ण योगी जीवन के प्रैक्टिकल रूप का अनुभव कराना, तीनो ही सेवा एक समय करनी है । अलग- अलग नहीं, समय कम है और सेवा अभी भी बहुत करनी है । बापदादा ने देखा कि सबसे सहज सेवा का साधन है – वृत्ति द्वारा वायब्रेशन बनाना और वायब्रेशन द्वारा वायुमण्डल बनाना क्योकि वृत्ति सबसे तेज साधन है । जैसे साइंस की राकेट फास्ट जाती है वैसे आपकी रूहानी शुभ भावना, शुभ कामना की वृत्ति, दृष्टि और सृष्टि को बदल देती है । एक स्थान पर बैठे भी वृत्ति द्वारा सेवा कर सकते है । सुनी हुई बात फिर भी भूल सकती है लेकिन जो वायुमण्डल का अनुभव होता है, वह भूलता नही है । जैसे मधुबन मे अनुभव किया है कि ब्रह्मा बाप की कर्मभूमि, योग भूमि, चरित्र भूमि का वायुमण्डल है । अब तक भी हर एक उसी वायुमण्डल का जो अनुभव करते है वह भूलता नही है । वायुमण्डल का अनुभव दिल मे छप जाता है । तो वाणी द्वारा बडे-बड़े प्रोग्राम तो करते ही हो लेकिन हर एक को अपनी श्रेष्ठ रूहानी वृत्ति से, वायब्रेशन से वायुमण्डल बनाना है, लेकिन वृत्ति रूहानी और शक्तिशाली तब होगी जब अपने दिल मे, मन मे किसी के प्रति भी उल्टी वृत्ति का वायब्रेशन नही होगा । अपने मन की वृत्ति सदा स्वच्छ हो क्योंकि किसी भी आत्मा के प्रति अगर कोई व्यर्थ वृत्ति या ज्ञान के हिसाब से निगेटिव वृत्ति है तो निगेटिव माना किचडा, अगर मन में किचडा है तो शुभ वृत्ति से सेवा नहीं कर सकेंगे । तो पहले अपने आपको चेक करो कि मेरे मन की वृत्ति शुभ रूहानी है ? निगेटिव वृत्ति को भी अपनी शुभ भावना शुभ कामना से निगेटिव को भी पॉजिटिव में चेंज कर सकते हो क्योंकि निगेटिव से अपने ही मन में परेशानी तो होती है ना ! वेस्ट थोट्स तो चलते हैं ना ! तो पहले अपने को चेक करो कि मेरे मन में कोई खिटखिट तो नही है? नम्बरवार तो हैं, अच्छे भी है तो साथ मे खिटखिट वाले भी हैं, लेकिन यह ऐसा है, यह समझना अच्छा है । जो रोंग है उसको रोंग समझना है, जो राइट है उसको राइट समझना है लेकिन दिल में बिठाना नही है । समझना अलग है, नॉलेजफुल बनना अच्छा है, रांग को रांग तो कहौ ना ! कई बच्चे कहते हैं बाबा आपको पता नही यह कैसे है ! आप देखो ना तो पता पड जाए । बाप मानते है आपके कहने से पहले ही मानते है कि ऐसे है, लेकिन ऐसी बातों को अपनी दिल में वृत्ति में रखने से स्वयं भी तो परेशान होते हो । और खराब चीज अगर मन में है, दिल में है तो जहाँ खराब चीज है, वेस्ट थॉटस है, वह विश्व कल्याणकारी कैसे बनेंगे ? आप सभी का आक्यूपेशन क्या है ? कोई कहेगा हम लण्डन के कल्याणकारी हैं, दिल्ली के कल्याणकारी हैं, यूपी के कल्याणकारी हैं ? या जहाँ भी रहते हो, चलो देश नहीं तो शहर के कल्याणकारी है, आक्यूपेशन सब यही बताते कि विश्व कल्याणकारी हैं । तो सब कौन हो ? विश्व कल्याणकारी हो ? हैं तो हाथ उठाओ । (सभी ने हाथ उठाया) विश्व कल्याणकारी ! विश्व कल्याणकारी ! अच्छा । तो मन में कोई भी खराबी तो नही है ? समझना अलग चीज है, समझो भले, यह राइट है यह रोंग है, लेकिन मन में नही बिठाओ । मन में वृत्ति रखने से दृष्टि और सृष्टि भी बदल जाती है ।

बापदादा ने होम वर्क दिया था – क्या दिया था ? सबसे सहज पुरुषार्थ है जो सभी कर सकते है, मातायें भी कर सकती हैं, बूढ़े भी कर सकते हैं, युवा भी कर सकते हैं, बच्चे भी कर सकते हैं, वह यही विधि है सिर्फ एक काम करो किसी से भी सम्पर्क में आओ – ‘दुआ दो और दुआ लो।’ चाहे वह बददुआ देता है, लेकिन आप कोर्स क्या कराते हो ? निगेटिव को पॉजिटिव में बदलने का, तो अपने को भी उस समय कोर्स कराओ । चैलेन्ज क्या है ? चैलेन्ज है कि प्रकृति को भी तमोगुणी से सतोगुणी बनाना ही है । यह चैलेन्ज है ना ! है ? आप सबने यह चैलेन्ज की है कि प्रकृति को भी सतोप्रधान बनाना है ? बनाना है ? कांध हिलाओ, हाथ हिलाओ । देखो, देखादेखी नहीं हिलाना । दिल से हिलाना, क्योकि अभी समय प्रमाण वृत्ति से वायुमण्डल बनाने के तीव्र पुरुषार्थ की आवश्यकता है । तो वृत्ति में अगर जरा भी किचडा होगा, तो वृत्ति से वायुमण्डल कैसे बनायेंगे ? प्रकृति तक आपका वायब्रेशन जायेगा, वाणी तो नहीं जायेगी । वायब्रेशन जायेगा और वायब्रेशन बनता है वृत्ति से, और वायब्रेशन से वायुमण्डल बनता है । मधुबन में भी सब एक जैसे तो नही है । लेकिन ब्रह्मा बाप और अनन्य बच्चो के वृत्ति द्वारा, तीव्र पुरुषार्थ द्वारा वायुमण्डल बना है ।

आज आपकी दादी याद आ रही है, दादी की विशेषता क्या देखी ? कैसे कंट्रोल किया? कभी भी कैसी भी वृत्ति वाले की कमी दादी ने मन में नही रखी । सभी को उमंग दिलाया । आपकी जगदम्बा माँ ने वायुमण्डल बनाया । जानते हुए भी अपनी वृत्ति सदाशुभ रखी, जिसके वायुमण्डल का अनुभव आप सभी कर रहे हो । चाहे फॉलो फादर है लेकिन बापदादा हमेशा कहते हैं कि हर एक की विशेषता को जान उस विशेषता को अपना बनाओ । और हर एक बच्चे में यह नोट करना, बापदादा का जो बच्चा बना है उस एक एक बच्चे मे, चाहे तीसरा नम्बर है लेकिन यह ड़ामा की विशेषता है, बापदादा का वरदान है, सभी बच्चों में चाहे 99 गलतियां भी हो लेकिन एक विशेषता जरूर है । जिस विशेषता से मेरा बाबा कहने का हकदार है । परवश है लेकिन बाप से प्यार अटूट होता है । इसीलिए बापदादा अभी समय की समीपता अनुसार हर एक जो भी बाप के स्थान हैं, चाहे गांव मे है, चाहे बड़े जोन मे है, सेंटर्स पर है लेकिन हर एक स्थान और साथियों मे श्रेष्ठ वृत्ति का वायुमण्डल आवश्यक है । बस एक अक्षर याद रखो अगर कोई बददुआ देता भी है, तो लेने वाला कौन ? क्या देने वाला, लेने वाला एक होता है या दो ? अगर कोई आपको कोई खराब चीज़ दे, आप क्या करेंगे? अपने पास रखेंगे ? या वापस करेगे या फेंक देंगे कि अलमारी मे सम्भाल के रखेंगे ? तो दिल में सम्भाल के नही रखना क्योंकि आपकी दिल बापदादा का तख्त है । इसीलिए एक शब्द अभी मन में पक्का याद कर लो, मुख मे नहीं मन में याद करो – दुआ देना है, दुआ लेना है । कोई भी निगेटिव बात मन में नहीं रखो । अच्छा एक कान से सुना, दूसरे कान से निकालना तो आपका काम है कि दूसरे का काम है ? तब ही विश्व मे, आत्माओ में फास्ट गति की सेवा वृत्ति से वायुमण्डल बनाने की कर सकेंगे । विश्व परिवर्तन करना है ना! तो क्या याद रखेंगे ? याद रखा मन से ? दुआ शब्द याद रखो, बस क्योंकि आपके जड़ चित्र क्या देते है?  दुआ देते है ना ! मन्दिर में जाते हैं तो क्या मांगते है ? दुआ मागते हैं ना ! दुआ मिलती है तभी तो दुआ मागते हैं । आपके जड़ चित्र लास्ट जन्म में भी दुआ देते है, वृत्ति से उनकी कामनाये पूरी करते है । तो आप बार-बार ऐसे दुआ देने वाले बने हो तब आपके चित्र भी आज तक दुआये देते हैं । चलो परवश आत्माओ को अगर थोडा सा क्षमा के सागर के बच्चे क्षमा दे दी तो अच्छा ही है ना ! तो आप सभी क्षमा के मास्टर सागर हो ? हो या नही हो? हो ना! कहो पहले मै । इसमें हे अर्जुन बनो । ऐसा वायुमण्डल बनाओ जो कोई भी सामने आये वह कुछ न कुछ स्नेह ले, सहयोग ले, क्षमा का अनुभव करे, हिम्मत का अनुभव करे, सहयोग का अनुभव करे, उमंग-उत्साह का अनुभव करे । ऐसे हो सकता है ? हो सकता है ? पहली लाइन वाले हो सकता है ? हाथ उठाओ । पहले करना पडेगा । तो सभी करेगे ? टीचर्स करेगी ?

अच्छा – अभी लास्ट टर्न मे 15 दिन पडे हैं, ठीक है ना । मधुबन मे तो मदद है ही, आप सभी जितने भी है, जहाँ के भी हो लेकिन यह 15 दिन यह प्रैक्टिस करना कि दुआ देना है और दुआ लेना है । ठीक है ? यह होमवर्क ठीक है? करेंगे ? मधुबन वाले, अच्छा है, मधुबन वालो को सीट बहुत अच्छी मिली है, सीट अच्छी ले ली है, होशियार है मधुबन वाले, सीट अच्छी पकड ली है । अभी नम्बरवन की भी सीट लेनी है क्योकि मधुबन वासी बनना, भाग्य की निशानी है । और अभी सभी कहाँ के हो ? लण्डन के, अमेरिका के, अभी सभी मधुबन के हो । इस समय तो मधुबन के हो ना? कितना अच्छा है । अभी सब मधुबन निवासी हैं । तो 15 दिन के बाद बापदादा रिजल्ट लेगे, ठीक है ? पीछे वाले ठीक है ? ऊपर गैलरी मे भी बैठे है । गैलरीवाले ठीक है? अच्छा । अभी विश्वको बहुत आवश्यकता है । आप निवारण मूर्त बन जाओ । आपके निवारण मूर्त बनने से आत्माये निर्वाण में जा सकेंगी । अगर आप निवारण मूर्त नहीं बनेगे तो आत्माये बिचारी निर्वाण में जा नही सकेगी । निर्वाण का गेट आपको ही खोलना है । बाप के साथ-साथ गेट खोलेगे ना ? गेट की सेरीमनी करेंगे ना?  अभी डेट बनाना आपस मे । बापदादा सब मीटिंग सुनते है, बापदादा को क्या है, स्वीच आन किया, सुना । एक ही समय पर सभी जोन, सभी देश की बातें सुन सकते है, सुनने चाहे तो । अभी बेहद मे आओ । कोई कोई बच्चे थोड़े ज्यादा गम्भीर बनते है, गम्भीरता अच्छी है लेकिन ज्यादा गम्भीरता सीरियस लगता है, तो सीरियस किसको अच्छा नहीँ लगता है । गम्भीर बनो लेकिन अन्दर गम्भीरता हो, बाहर चेहरा मुस्कराता हो । मुस्कराता हुआ चेहरा सभी को पसन्द आता है और ऐसे ज्यादा गम्भीर वाला चेहरा उससे डरते है, दूर भागते है । सहयोगी नही बनेगे । ब्रह्मा बाप का मुस्कराना, जगत अम्बा माँ का मुस्कराना, अपनी दादी का मुस्कराना, याद है ना ! डबल फारेनर्स को भी दादी का मुस्कराता चेहरा अच्छा लगता है ना ! हाथ हिला रहे है । हँसो नहीं, मुस्कराओ । जोर से हंसना नही, मुस्कराना क्योंकि बापदादा को अभी तीव्र पुरुषार्थ चाहिए । क्यों ? क्योंकि बापदादा ने देखा कि बहुत काल का संस्कार आवश्यक है । अगर अन्त में तीव्र पुरुषार्थ करेंगे तो बहुतकाल में जमा नही होगा । और बहुतकाल में अगर आपका जमा नहीं होगा तो 21 जन्म का बहुतकाल का अधिकार भी कम हो जायेगा । तो बापदादा नहीं चाहता है कि एक भी बच्चे का अधिकार कम हो, जब मेरा बाबा कहा, तो मेरा बाबा कहने वाले बच्चे का अधिकार कम नहीं होना चाहिए क्योंकि बाप का तो चाहे लास्ट बच्चा है, बाप जानता है, लास्ट है लेकिन कभी मुरली में नहीं कहा कि वह लास्ट बच्चा है । मीठे मीठे बच्चे कहते है तो जो कडुवे है उन्हो को छोडके मीठे बच्चों को याद प्यार, यह कभी कहा है ? जानते तो हैं कि वह लास्ट बच्चा है लेकिन फिर भी मीठे मीठे बच्चे कहते है, कडुवा नही कहते है । तो बाप समान बनना है ना ! बापदादा को खुशी होती है, जब सभी का लक्ष्य पूछते हैं तो कहते हैं बाप समान बनना है, लास्ट नम्बर भी यही कहता है, तो बापदादा खुश होते है, फिर भी लक्ष्य ऊंचा रखा है तो लक्षण भी आते जायेंगे । बहुतकाल जरूर इकट्ठा करना है फिर लास्ट में नही उल्हना देना कि हमें तो बहुतकाल याद ही नही था । 63 जन्म के बहुतकाल का प्रभाव अभी तक भी देख रहे हैं । चाहते नही है हो जाता है, यह क्या है ? बहुतकाल का प्रभाव है । इसलिए बापदादा हर एक प्यारे से प्यारे बच्चों को यही कहते हैं तीव्र पुरुषार्थी भव ! होमवर्क याद रखना, 15 दिन के बाद रिजल्ट पूंछेगें । 15 दिन मे संस्कार पड जायेगे ना ! तो आगे भी होगा । यहाँ तो वायुमण्डल की मदद है ना । और सब मधुबन वाले ड्यूटी में हैं या जोन जिसका टर्न है, वह ड्यूटी पर है और तो सब फ्री है । तो क्या करेंगे ? दादी (दादी जानकी से) सुनाओ क्या करेंगे? करके दिखायेंगे ? करके ही दिखाना है । (बाबा जरूर आपको प्रत्यक्ष करके दिखायेंगे) पहले अपने को प्रत्यक्ष करो तब बाप प्रत्यक्ष होगा । क्योकि आप द्वारा होना है ना ! तो बाप कहते है आप कब अपने को प्रत्यक्ष करेंगे ? आपसे तो बाप प्रत्यक्ष हो ही जायेगा । है उमंग ? कितना उमंग है ? बहुत उमंग है ? सभी को जितना बहुत-बहुत उमंग है उतना ही बापदादा पदम-पदम-पदमगुणा इन एडवांस मुबारक दे रहे है । अच्छा ।

जगह जगह से बच्चो के ईमेल और पत्र तो आते ही हैं । तो जिन्होंने पत्र भी नही लिखा है लेकिन संकल्प किया है तो संकल्प वालों का भी याद प्यार बापदादाके पास पहुंच गया है । पत्र बहुत मीठे मीठे लिखते हैं । पत्र ऐसे लिखते है जो लगता है कि यह उमंग-उत्साह में उडते ही रहेंगे । फिर भी अच्छा है, पत्र लिखने से अपने को बंधन में बांध लेते हैं, वायदा करते है ना ! तो चारों ओर के जो जहाँ देख रहे है या सुन रहे हैं, उन सभी को भी बापदादा सम्मुख वालों से भी पहले यादप्यार दे रहे हैं क्योंकि बापदादा जानते हैं कि कहाँ कोई टाइम है, कहाँ कोई टाइम है लेकिन सब बड़े उत्साह से बैठे हैं, याद में सुन भी रहे है । अच्छा ।

सेवा का टर्न – यूपी. और इन्दौर लोन का है – (सामने टीचर्स खड़ी है) यह सब टीचर्स है । दोनो तरफ की टीचर्स है । अच्छा है । बापदादा को टीचर्स पर भी नाज है क्योंकि हिम्मत रखकर सरेण्डर होके सारी जीवन सेवा के प्रति लगाने का संकल्प ले लिया है । टीचर्स पक्की है ना? पक्के है कि थोड़े थोडे कच्चे है? टीचर्स कच्चे नहीं बनना । टीचर्स अर्थात् अपने फीचर्स से फ्यूचर दिखाने वाली । अभी संगमयुग का फ्यूचर है – फरिश्ता भव । और भविष्य का फीचर्स है – देवता भव । तो जो भी सेवाधारी ग्रुप आया है, उनको डबल नशा है कि फरिश्ता सो देवता बनना ही है ! सभी पक्के है ना? हाँ देखो, आपका फोटो आ रहा है, तो ऐसा नहीं हो कि फोटो दिखाई नहीं दे, पक्के रहना । क्योकि जब कहाँ थोड़ी बहुत हलचल होती है ना तो कई बहुत जल्दी घबरा जाते हें । गहराई में नही जाते, घबरा जाते है । अगर गहराई में जाये ना, तो कभी भी कितना भी बडा हलचल वाला पेपर हो या बात हो लेकिन गहराई मे जाने वाले जैसे समुद्र होता है ना, तो समुद्र के तले में जाने वाले बहुत माल लेके आते हैं । ऊपर-ऊपर वाले नही, ऊपर वालो को तो मछली मिलेगी लेकिन गहराई मे जाने वाले बहुत चीज़ें ले आते हैं । तो यहाँ भी कोई भी बात होवे, बातें तो आयेगी, बाते नहीं आयेगी – यह बापदादा नही कहेगा । जितना आगे जायेगे उतनी सूक्ष्म बाते आयेगी क्योकि पास विद आनर होना है ना । टीचर्स ने क्या सोचा है ?  पास विद आनर होना है या 33 मार्क्स से पास होना है ? पास विद आनर होना है तो हाथ उठाओ । इन्हो का अच्छी तरह से फोटो निकालो । अच्छा । तो हलचल मे घबराना नहीं । बापदादा को उस समय भूल जाते हो, अकेले बन जाते हो ना तो छोटी बात भी बडी लगती है । बापदादा कम्बाइण्ड है, कम्बाइण्ड रखो, अनुभव करो तो देखो पहाड भी रूई बन जायेगा । कोई बडी बात नही है । कितने बारी पास हुए हो, कितने कल्प पास हुए हो, पता है ? नशा है ? अनेक बार मैं ही पास हुआ हूँ, अभी रिपीट करना है । नई बात नहीं है, सिर्फ रिपीट करना है, यह स्मृति रखो । तो इन्दौर और यूपी, यूपी को तो साकार माँ बाप की बहुत पालना मिली है । तो यूपी को तो कमाल करना है । और इन्दौर की भी विशेषता है कि साकार बाप की प्रेरणा से सेण्टर खुला है । ऐसे है ना ? दोनों की विशेषता है, तो अभी दोनों ही करो कमाल । ऐसा वायुमण्डल बनाके दिखाओ, जैसे अभी किसको भी परिचय देते हो तो क्या कहते हो ? मधुबन में आके देखो, कहते हो ना ! तो अभी अपने जोन को, अपने स्थान को ऐसा बनाओ जो किसको भी कहें कि इन्दौर मे जाके देखो, यूपी मे जाके देखो । ठीक है ना ? पसन्द है ना ? क्या नही हो सकता है ! आप एक-एक मास्टर सर्वशक्तिवान के संकल्प में इतनी ताकत है जो चाहो वह हो सकता है । सिर्फ दृढता चाहिए । दृढता की चाबी कभी-कभी माया चोरी कर देती है । इस चाबी को सदा यूज करो, ऐसे नही सम्भाल के रखो, दिमाग में है, चाबी है लेकिन समय पर यूज करो । समय बीत जाता है ना, फिर क्या कहते हैं, करना तो ऐसे था, था, था करते है । तो था, था नही करना । समय पर करना । तो जोन नम्बरवन हो जायेगा । सभी का लक्ष्य अच्छा है, नम्बरवन होना है । यही लक्ष्य है ना, कि जो भी नम्बर मिले ठीक है ? बापदादा को भी हर जोन प्यारे ते प्यारा है, क्योंकि हर जोन में कोई न कोई विशेषता है, लेकिन अभी खास विशेषता प्रत्यक्ष नहीं किया है । होना तो है ही । होना तो है ! नही, हुआ ही पडा है, सिर्फ रिपीट करो । तो सब खुश है ? कभी खुशी तो नही गंवाते ? खुशी गई जीवन गई । नीरस जीवन में कोई मजा नहीं । तो अच्छा है, कोई कमाल करके दिखाओ । अभी बापदादा ने सभी जोन को कहा है कोई नवीनता करके दिखाओ । अभी नवीनता नहीं दिखाई है । यह बड़े प्रोग्राम करना, यह वर्गीकरण के प्रोग्राम करना, यह तो हो रहे है, होते रहेंगे । अब कोई नवीनता दिखाओ । उसमें देखे कौन सा जोन आगे जाता है, विदेश जावे या देश जाये । जो सब कापी कर सके, ऐसी नवीनता हो । देखेंगे, कौन करता है । करना तो है ही । अच्छा । बहुत अच्छा चांस लिया, बापदादा कहते है जो हर विशेषता मे चांस लेते हैं वह चांसलर बन जाते है । यज्ञ सेवा का पुण्य जमा किया, बहुत बडा पुण्य जमा किया क्योंकि यहाँ वायुमण्डल और बेफिकर की मदद है, कोई जिम्मेवारी का फिकर नही, जो ड्यूटी मिली वही करनी है, बस । तो दोनो जोन ने बहुत-बहुत कमाई जमा की? थोडी तो नही की, बहुत की? अच्छा ।

96 देशों से 900 विदेशी भाई-बहिनें आये हैं – विदेश वाले संख्या बढाने मे अच्छा रिकार्ड दिखा रहे है । एक तरफ संख्या बढा रहे है और दूसरी तरफ एरिया को सम्पन्न बनाने का भी उमंग अच्छा है । बापदादा ने सुना कि मैजॉरिटी सभी तरफ अभी एक दो को उमंग आ रहा है, हर एक अपनी एरिया को चेक करके सन्देश देने का प्रोग्राम बना रहे है । भिन्न-भिन्न विधि से कर रहे है लेकिन जो भी कर रहे हो वह अच्छा कर रहे हो । अपना उल्हना उतार रहे हो । यह उमंग-उत्साह स्वयंम को भी उड़ाता है, और औरो मे भी खुशी की लहर फैलाता है । जैसे कोई डूबे हुए को पत्ते का भी सहारा मिल जाता है, तिनके का सहारा मिल जाता है ना, ऐसे दुःखी आत्माओं को सहारा मिल जाता है । उनके मन से जो दुआये निकलती है वह आपके पुण्य के खाते मे जमा हो जाती है । यह गुह्य हिसाब है । जितनों को जो प्राप्ति होती है, आपके खाते मे वो प्राप्ति जमा हो जाती है । बाकी अच्छा मीटिंग का भी समाचार सुना, अच्छा अटेंशन दे रहे है । अपनी अवस्था का भी अच्छा चांस लेते है और सेवा के प्रोग्राम मे भी अच्छा भविष्य प्रोग्राम बना देते है । एक उमंग अच्छा है, कि जो स्नेही सहयोगी है उन्हो को और सहजयोगी बनाने मे समीप लाये है । यह भारत वाले भी करते है लेकिन फारेन वाले भी अच्छा कर रहे है । अभी सभी मैजॉरिटी जहॉ-जहाँ सेवा करते हो चाहे वीआईपी है, चाहे साधारण है लेकिन समझते है कि यहाँ कुछ मिलता है । कुछ नवीनता है, अभी यह वायुमण्डल पहले से काफी चेंज हो गया है । पहले कितना मुश्किल से बुलाने पर आते थे, अभी तो वह खुद कहते हैं कि हमको चांस लेने दो, फर्क हो गया ना । तो विदेश की सेवा पर भी बापदादा खुश है । लेकिन स्व की सेवा में क्या सुनाया? तीव्र पुरुषार्थी, पुरुषार्थी सभी हैं लेकिन तीव्र पुरुषार्थी बनना है, जो सोचा वह किया, बाप ने कहा बच्चों ने किया । यही आपके जगत अम्बा की युक्ति थी, नम्बरवन हो गई । तो रात को और चलते फिरते भी चेक करो कि जो बाप ने कहा करना है, चलना है, सोचना है, वह किया ? जो बाप ने कहा वह करना ही है । बाकी वृद्धि भी है और अटेंशन भी है । प्रोग्राम भी अच्छे बनाये है । डबल मुबारक हो । अच्छा ।

भिन्न-भिन्न वर्ग वाले भी आये हैं, बापदादा को मालूम है, अपनी अपनी मीटिंग्स कर रहे हैं । जो भी वर्ग वाले आये है, प्लैन तो बहुत अच्छा बना रहे है, अभी सिर्फ एडीशन यह करो कि जब भी मीटिंग करते है तो हमेशा स्व और सेवा दोनो का बैलेन्स रख एक दो को सेवा का उमंग भी दिलाओ, लेकिन साथ में स्वउन्नति का उमंग-उत्साह भी दिलाओ । बैलेन्स रखो । तो डबल करने से डबल ब्लैसिंग मिलेगी । यह ऑटोमेटिक ब्लैसिंग मिलती है, देनी नहीं पड़ती है ऑटोमेटिक मिलती है । बापदादा ने देखा है – स्व-उन्नति का भी समाचार भेजा है । (स्पार्क मीटिंग का समाचार रमेश भाई ने लिखकर सन्देशी द्वारा बापदादा के पास भेजा था) रमेश जो कर रहे हैं ना, उसमे स्व-उन्नति का भी लिखा है, उसको बार-बार अटेंशन दिलाओ । जैसे सेवा में प्रैक्टिकल कर लेते हो ना, ऐसे स्व-उन्नति में प्रैक्टिकल किया या नही उसका भी चार्ट रखो । बाकी समाचार मिला था, सोचा अच्छा है । जिन्होंने भी मीटिग की है बापदादा को समाचार मिला है । अभी तक बापदादा को एक बात का वर्ग वालो ने रेसपान्ड नही दिया है, याद है ? कौन सा रेसपान्ड नही दिया है ? बापदादा चाहते है हर एक वर्ग का एक एक विशेष स्नेही भी हो, सहयोगी भी हो, वीआईपी भी हो, माइक भी हो और सहजयोग के इंटरेस्ट वाला भी हो, ऐसा हर वर्ग का एक-एक का ग्रुप बाप के आगे आवे, सभी वर्ग का, एक वर्ग का नहीं, कभी कोई आईपी आते हैं, वीआईपी आते हैं वह वेलकम । लेकिन बापदादा एक ही समय पर हर वर्ग के ऐसे क्वालिफिकेशन वाले ग्रुप को देखने चाहता है । आईपीज का ग्रुप आता है लेकिन वर्गीकरण का एक विशेष माइक हो, आप सकाश बनो वह स्पीकर बने । आप माइट वह माइक । तो यह अभी करके दिखाना । फारेन वाले तो प्रोग्राम करते है, उसमे आ जाते है । काल आफ टाइम भी करते हैं, उसमें भी आईपी आ जाते हैं । यह वर्गीकरण के रूप में माइक लाना । यह ध्यान रखना । (ऐसे हर वर्ग के भारत में तैयार हैं, बापदादा मिलने की डेट दें ) अभी सभी वर्गो से एक-एक माइक हो, ऐसा ग्रुप लाओ, उसके लिए टाइम देंगे । अच्छा । सभी ने संकल्प किया, तीव्र पुरुषार्थ कर नम्बरवन बनना ही है । किया? हाथ उठाओ । अच्छा अभी टीचर्स उठा रही हैं । पहली लाइन तो है ही ना । अच्छा है –

बापदादा ने यह भी डायरेकशन दिया कि सारे दिन मे बीच-बीच में 5 मिनिट भी मिले, उसमे मन की एक्सरसाइज करो क्योंकि आजकल का जमाना एक्सरसाइज़ का है । तो 5 मिनट में मनकी एक्सरसाइज करो, मन को परमधाम मे लेके आओ, सूक्ष्मवतन में फरिश्तेपन को याद करो फिर पूज्य रूप याद करो, फिर ब्राह्मण रूप याद करो, फिर देवता रूप याद करो । कितने हुए? पांच । तो पांच मिनट मे 5 – यह एक्सरसाइज करो और सारे दिन में चलते फिरते यह कर सकते हो । इसके लिए मैदान नही चाहिए, दौड़ नही लगानी है, न कुर्सी चाहिए, न सीट चाहिए, न मशीन चाहिए । जैसे और एक्सरसाइज शरीर की आवश्यक है, वह भले करो, उसकी मना नहीं है । लेकिन यह मन की ड्रील, एक्सरसाइज, मन को सदा खुश रखेगी । उमंग-उत्साह में रखेगी, उड़ती कला का अनुभव करायेगी । तो अभी- अभी यह ड्रील सभी शुरू करो – परमधाम से देवता तक । (बापदादा ने ड्रील कराई) अच्छा –

चारों ओर के सदा अपने वृत्ति से रूहानी शक्तिशाली वायुमण्डल बनाने वाले तीब्र पुरुषार्थी बच्चों को, सदा अपने स्थान और स्थिति को शक्तिशाली वाईब्रेशन में अनुभव कराने वाले दृढ़ संकल्प वाले श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा दुआ देने और दुआ लेने वाले रहमदिल आत्माओं को, सदा अपने आपको उड़ती कला का अनुभव करने वाले डबल लाइट आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते ।

दादियों से – आप लोगो का संगठन सभी को सकाश देता है । देता है ना ? क्योकि फिर भी अनुभवी हो ना ! तो अनुभवी का प्रभाव ज्यादा पडता है । आदि से आप आत्माओं मे बाप और माँ ने अनुभवी मूर्त बनने का संस्कार डाल दिया है । डाला है ना ! बापदादा भी खुश होते हैं । अच्छा है, ठीक है ? कैसी भी तबियत है लेकिन यज्ञ का श्रंगार हो । (दादी शान्तामणि को देखकर) चाहे भागदौड नही भी कर सकते है लेकिन आप लोगो को देख करके भी, आप लोगो की हाजिरी भी सभी को बल देती है । आदि रत्न हो ना ! तो आदि के संस्कार पावरफुल, आदि की भट्ठी सभी याद करते है ना ! वह साकार की पालना सभी याद करते है । अच्छा ।

मोहिनी बहन ने दादी जी की याद बापदादा को दी – बापदादा भी बहुत-बहुत याद दे रहे हैं । बाप को सिर्फ याद नही है, सभी को याद है । बाप भी याद करते है । इसीलिए जैसे ब्रह्मा बाप एक एग्जाम्पल था, वैसे दादी भी एक एग्जाम्पल है । अचानक के पार्ट को कितना सहज कर दिया । ब्रह्मा बाप ने यज्ञ को रचा, लेकिन दादी ने ब्रह्मा बाप से भी ज्यादा समय यज्ञ सम्भाला । इसीलिए सभी के दिल मे दादी की याद है ही । क्योंकि उनके गुण, उसका चेहरा, उसकी चलन विशेष रही है, इसीलिए सबके दिल मे विशेष याद है ही है । अभी सभी ने योग किया ना, यह प्यार की निशानी है । अभी और जोर से योग करो जो दादी मधुबन मे पहुंच जायेगी । जैसे वह आक्सीजन देते है ना, वेंटीलेटर से देते है तो सायंस पावर से आपकी साइलेन्स पावर कम थोडे ही है । और योग लगाओ, पावरफुल योग । देखो, आपके योग से डाक्टर्स को टचिंग हुई, कोई तो विधि चेंज की ना । अभी धीरे- धीरे कर रहे है, आप सभी के दृढ संकल्प से विधि भी निकल आयेगी । ठीक है ना ! और योग लगाओ, योग को कम नही करना । अच्छा । जो भी सेवाधारी हैं मुन्नी है, योगिनी है, गुप्ता है और कुमारियां भी है सभी दिल से सेवा कर रहे है, बापदादा आपके दिल की मेहनत देख खुश हैं और आपकी मेहनत अवश्य रूप दिखायेगी ।

निर्वेर भाई ने सबकी याद दी – सभी का मन यहाँ है, तन वहाँ है । (अभी सबका एक ही संकल्प है दादी चले, फिरे) होना तो है ही । अच्छा है ।

बृजमोहन भाई से – दिल्ली में कोई ऐसी नई इन्वेशन करो जो सब कर सके, छोटे बडे सब कर सके ।

विदेश की मुख्य बहनों से – बहुत अच्छा है, विदेश को अनुभवी आत्मायें होने के कारण अच्छा आगे बढ़ा रहे हो क्योंकि जो आप लोगों में बाप की डायरेक्ट पालना का बीज है, वह बीज फल दे रहा है । अभी सेवा की वृद्धि और उमंग-उत्साह बढ रहा है । पहले जो नाजुकपन था, अभी नाजुकपन खत्म हो गया है । वह कलचर भी खत्म हो गया है, क्योकि आप लोग एग्जाम्पल हो ना, तो आपके एग्जाम्पल को देखकर अभी समझ गये है कि क्या करना है । बाकी प्लैन बहुत अच्छा बनाया है । यह ग्रुप-ग्रुप बनाके जो उन्होंने के अनुसार ट्रेनिंग देते है ना, वह बहुत अच्छा । टीचर्स भी रिफ्रेश और आने वाले भी रिफ्रेश हो जाते हें । जिस डिपार्टमेंट को जो चाहिए वह मिलता है, यह अच्छा है । और अटेंशन दिलाना भी बहुत जरूरी है । अच्छा किया है । यज्ञ में भी अटेंशन दिया, यह भी बहुत अच्छा किया है क्योकि यज्ञ के हो । सिर्फ सेवा के लिए बाहर गये हैं । तो आप लोगो का जरा भी इशारा अच्छा होता है, इसमे खराब नही मानो, अच्छा है । बापदादा खुश है । इतना टाइम भी देते तो हो ना । अभी ऐसा एक दो के विचारो में समीप आओ जो सभी समझे कि यह सब एक है, 6 नही है एक है, इतना एक दो के विचारो के भी नजदीक । हो रहा है, बापदादा देख रहे हैं किया है और आगे भी करते रहेंगे । (दिल से बहुत थैक्स) आपको बहुत थैक्स ।

Avyakt Bapdada Murli 12 October 2018

31-10-06   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे”

आज प्रेम के सागर अपने परमात्म प्रेम के पात्र बच्चों से मिलने आये हैं। आप सब भी स्नेह के अलौकिक विमान से यहाँ पहुंच गये हो ना! साधारण प्लेन में आये हो वा स्नेह के प्लेन में उड़कर पहुंच गये हो? सभी के दिल में स्नेह की लहरें लहरा रही हैं और स्नेह ही इस ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन है। तो आप सभी भी जब आये तो स्नेह ने खींचा ना! ज्ञान तो पीछे सुना, लेकिन स्नेह ने परमात्म स्नेही बना दिया। कभी स्वप्न में भी नहीं होगा कि हम परमात्म स्नेह के पात्र बनेंगे। लेकिन अब क्या कहते हो? बन गये। स्नेह भी साधारण स्नेह नहीं है, दिल का स्नेह है। आत्मिक स्नेह है, सच्चा स्नेह है, नि:स्वार्थ स्नेह है। यह परमात्म स्नेह बहुत सहज याद का अनुभव कराता है। स्नेही को भूलना मुश्किल होता है, याद करना मुश्किल नहीं, भूलना मुश्किल होता है। स्नेह एक अलौकिक चुम्बक है। स्नेह सहज योगी बना देता है। मेहनत से छुड़ा देता है। स्नेह से याद करने में मेहनत नहीं लगती। मुहब्बत का फल खाते हैं। स्नेह की निशानी विशेष चारों ओर के बच्चे तो हैं ही लेकिन डबल विदेशी स्नेह में दौड़-दौड़ कर पहुंच गये हैं। देखो, 90 देशों से कैसे भागकर पहुंच गये हैं! देश के बच्चे तो हैं ही प्रभु प्रेम के पात्र, लेकिन आज विशेष डबल विदेशियों को गोल्डन चांस है। आप सबका भी विशेष प्यार है ना! स्नेह है ना। स्नेह है कितना! कितना? तुलना कर सकते हो किससे! कोई तुलना नहीं हो सकती।

आप सबका एक गीत है ना – न आसमान में इतने तारे हैं, ना सागर में इतना जल है…, बेहद का प्यार, बेहद का स्नेह है। बापदादा भी स्नेही बच्चों से मिलने पहुंच गये हैं। आप सब बच्चों ने स्नेह से याद किया और बापदादा आपके प्यार में पहुंच गये हैं। जैसे इस समय हर एक के चेहरे पर स्नेह की रेखा चमक रही है। ऐसे ही अब एडीशन क्या करना है? स्नेह तो है, यह तो पक्का है। बापदादा भी सर्टीफिकेट देते हैं कि स्नेह है। अभी क्या करना है? समझ तो गये हो। अभी सिर्फ अण्डरलाइन करना है – सदा स्नेही रहना है, सदा। समटाइम नहीं। स्नेह है अटूट लेकिन परसेन्टेज में अन्तर पड़ जाता है। तो अन्तर मिटाने के लिए क्या मन्त्र है? हर समय महादानी, अखण्डदानी बनो। सदा दाता के बच्चे विश्व सेवाधारी समान। कोई भी समय मास्टर दाता बनने के बिना नहीं रहें क्योंकि कार्य विश्व कल्याण का बाप के साथ-साथ आपने भी मददगार बनने का संकल्प किया है। चाहे मन्सा द्वारा शक्तियों का दान वा सहयोग दो। वाचा द्वारा ज्ञान का दान दो, सहयोग दो, कर्म द्वारा गुणों का दान दो और स्नेह सम्पर्क द्वारा खुशी का दान दो, कितने अखण्ड खज़ानों के मालिक, रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड हो। अखुट और अखण्ड खज़ाने हैं। जितने देंगे उतने बढ़ते जाते हैं। कम नहीं होंगे, बढ़ेंगे क्योंकि वर्तमान समय इन खज़ानों के मैजॉरिटी आप सबके आत्मिक भाई और बहनें प्यासी हैं। तो क्या अपने भाई बहिनों के ऊपर तरस नहीं पड़ता! क्या प्यासी आत्माओं की प्यास नहीं बुझायेंगे?कानों में आवाज नहीं आता ‘‘हे हमारे देव देवियाँ हमें शक्ति दो, सच्चा प्यार दो’’। आपके भक्त और दु:खी आत्मायें दोनों ही दया करो, कृपा करो, हे कृपा के देव और देवियाँ कहकर चिल्ला रहे हैं। समय की पुकार सुनाई देती है ना! और समय भी देने का अब है। फिर कब देंगे? इतना अखुट अखण्ड खज़ाने जो आपके पास जमा हैं, तो कब देंगे? क्या लास्ट टाइम, अन्तिम समय देंगे? उस समय सिर्फ अंचली दे सकेंगे।

तो अपने जमा हुए खज़ाने कब कार्य में लगायेंगे? चेक करो हर समय कोई न कोई खज़ाना सफल कर रहे हैं! इसमें डबल फायदा है, खज़ाने को सफल करने से आत्माओं का कल्याण भी होगा और साथ में आप सब भी महादानी बनने के कारण विघ्न-विनाशक, समस्या स्वरूप नहीं,समाधान स्वरूप सहज बन जायेंगे। डबल फायदा है। आज यह आया, कल यह आया, आज यह हो गया, कल वह हो गया। विघ्न-मुक्त, समस्या मुक्त सदा के लिए बन जायेंगे। जो समस्या के पीछे समय देते हो, मेहनत भी करते हो,कभी उदास बन जाते, कभी उल्हास में आ जाते, उससे बच जायेंगे क्योंकि बापदादा को भी बच्चों की मेहनत अच्छी नहीं लगती। जब बापदादा देखते हैं, बच्चे मेहनत में हैं, तो बच्चों की मेहनत बाप से देखी नहीं जाती। तो मेहनत मुक्त, पुरूषार्थ करना है लेकिन कौन सा पुरूषार्थ?क्या अभी तक अपनी छोटी-छोटी समस्याओं में पुरूषार्थी रहेंगे! अब पुरूषार्थ करो अखण्ड महादानी, अखण्ड सहयोगी, ब्राह्मणों में सहयोगी बनो और दु:खी आत्मायें, प्यासी आत्माओं के लिए महादानी बनो। अब इस पुरूषार्थ की आवश्यकता है। पसन्द है ना! पसन्द है! पीछे वाले पसन्द है! तो अभी कुछ चेंज भी करना चाहिए ना, वही स्व प्रति पुरूषार्थ बहुत टाइम किया। कैसे पाण्डव! पसन्द है? तो कल से क्या करेंगे? कल से ही शुरू करेंगे या अब से? अब से संकल्प करो – मेरा समय, संकल्प विश्व प्रति, विश्व की सेवा प्रति। इसमें स्व का ऑटोमेटिक हो ही जायेगा, रहेगा नहीं, बढ़ेगा। क्यों? किसी को भी आप उसकी आशायें पूरी करेंगे, दु:ख के बजाए सुख देंगे, निर्बल आत्माओं को शक्ति देंगे, गुण देंगे, तो वह कितनी दुआयें देंगे। और दुआयें लेना सबसे लेना सबसे सहज साधन है, आगे बढ़ने का। चाहे भाषण नहीं करो, प्रोग्राम ज्यादा नहीं कर सकते हो, कोई हर्जा नहीं, कर सकते हो तो और ही करो। लेकिन नहीं भी कर सकते हो तो कोई हर्जा नहीं, सफल करो खज़ानों को। सुनाया ना – मन्सा से शक्तियों का खज़ाना देते जाओ। वाणी से ज्ञान का खज़ाना, कर्म से गुणों का खज़ाना और बुद्धि से समय का खज़ाना, सम्बन्ध-सम्पर्क से खुशी का खज़ाना सफल करो। तो सफल करने से सफलता मूर्त बन ही जायेंगे, सहज। उड़ते रहेंगे क्योंकि दुआयें एक लिफ्ट का काम करती हैं, सीढ़ी का नहीं। समस्या आई, मिटाया, कभी दो दिन लगाया, कभी दो घण्टा लगाया, यह सीढ़ी चढ़ना है। दुआयें सफल करो, सफलता मूर्त बनो, तो लिफ्ट में सेकण्ड में पहुंच जायेंगे, जहाँ चाहो। चाहे सूक्ष्मवतन में पहुंचों, चाहे परमधाम में पहुंचो, चाहे अपने राज्य में पहुंचो, सेकण्ड में। लण्डन में प्रोग्राम किया था ना वन मिनट। बापदादा तो कहते हैं वन सेकण्ड। वन सेकण्ड में दुआओं की लिफ्ट में चढ़ जाओ। सिर्फ स्मृति का स्वीच दबाओ बस, मेहनत मुक्त।

तो बापदादा आज डबल विदेशियों का दिन है ना तो पहले डबल विदेशियों को किस स्वरूप में देखने चाहते हैं? मेहनत मुक्त, सफलता मूर्त, दुआओं के पात्र। बनेंगे ना? क्योंकि डबल विदेशियों का बाप से प्यार अच्छा है, शक्ति चाहिए लेकिन प्यार अच्छा है। कमाल तो की है ना? देखो90 देशों से अलग-अलग देश, अलग-अलग रसम-रिवाज लेकिन 5 ही खण्डों के एक चन्दन के वृक्ष बन गये हैं। एक वृक्ष में आ गये हैं। एक ही ब्राह्मण कल्चर हो गया, अभी है क्या इंगलिश है, कल्चर हमारा इंगलिश है, नहीं ना। ब्राह्मण है ना? जो समझते हैं अभी तो हमारा ब्राह्मण कल्चर है वह हाथ उठाओ। ब्राह्मण कल्चर और एडीशन नहीं। एक हो गये ना। इसकी मुबारक दे रहे हैं बापदादा कि सभी एक वृक्ष के बन गये। कितना अच्छा लगता है! किसी से भी पूछो, अमेरिका से पूछो, यूरोप से पूछो, आप कौन हो? तो क्या कहेंगे? ब्राह्मण है ना! कि नहीं, यू.के. के हैं, अफ्रीकन हैं, अमेरिकन हैं नहीं, सब एक ब्राह्मण हो गये। एक मत हो गये, एक स्वरूप के हो गये ब्राह्मण और एक मत श्रीमत। मजा आता है ना इसमें। मजा है? कि मुश्किल है? मुश्किल तो नहीं है ना! कांध हिला रहे हैं, अच्छा है।

बापदादा सेवा में नवीनता क्या चाहता है? जो भी सेवा कर रहे हो – बहुत-बहुत-बहुत अच्छी कर रहे हो, उसकी तो मुबारक है ही। लेकिन आगे एडीशन क्या करना है? आप लोगों के मन में है ना कोई नवीनता चाहिए। तो बापदादा ने देखा, जो भी प्रोग्राम किये हैं, समय भी दिया है, और मुहब्बत से ही किया है, मेहनत भी मुहब्बत से की है और अगर स्थूल धन भी लगाया है तो वह तो पदमगुणा होके आपके परमात्म बैंक में जमा हो गया है। वह लगाया क्या,जमा किया है। रिजल्ट में देखा गया कि सन्देश पहुँचाने का कार्य, परिचय देने का कार्य सभी ने बहुत अच्छा किया है। चाहे कहाँ भी किया, अभी दिल्ली में हो रहा है, लण्डन में हुआ और बापदादा को डबल फारेनर्स का कॉल ऑफ टाइम करते हैं, पीस ऑफ माइण्ड करते हैं, यह सब प्रोग्राम बहुत अच्छे लगते हो। जो भी और काम कर सको करते रहो, लेकिन सन्देश मिलता है, स्नेही भी बनते हैं, सहयोगी भी बनते हैं, सम्बन्ध में भी कोई-कोई आ जाते हैं लेकिन अभी एडीशन चाहिए- कि जब भी कोई बड़ा प्रोग्राम करते हो उसमें सन्देश तो मिलता है, अनुभव करके जायें कुछ, अनुभव बहुत जल्दी आगे बढ़ाता है। जैसे यह कॉल ऑफ टाइम में, या पीस ऑफ माइन्ड में थोड़ा-थोड़ा अनुभव ज्यादा करते हैं। लेकिन जो बड़े प्रोग्राम होते हैं उसमें सन्देश तो अच्छा मिल जाता है, लेकिन जो भी आवे उसके पीठ करके कुछ न कुछ अनुभव करे, क्योंकि अनुभव कभी भूलता नहीं है और अनुभव ऐसी चीज़ है जो न चाहते हुए भी उस तरफ खीचेंगे। तो पहले बापदादा कहते हैं जो सभी ब्राह्मण भी हैं, जो भी ज्ञान की प्वाइंटस हैं, उनका स्वयं अनुभवी बने हो? हर शक्ति का अनुभव किया है, हर गुण का अनुभव किया है? आत्मिक स्थिति का अनुभव किया है? परमात्म प्यार का अनुभव किया है? ज्ञान समझना इसमें तो पास हो, नॉलेजफुल तो बन गये हो, इसमें तो बापदादा भी रिमार्क्स देते हैं, ठीक है। आत्मा क्या, परमात्मा क्या, ड्रामा क्या, ज्ञान तो समझ लिया है, लेकिन जब चाहे जितना समय चाहें, जिस भी परिस्थिति में हो, उस परिस्थिति में आत्मिक बल का अनुभव हो, परमात्म शक्ति का अनुभव हो, वह होता है? जिस समय, जितना समय, जैसे अनुभव करने चाहो वैसे होता है? कि कभी कैसे कभी कैसे? सोचो आत्मा हूँ, और फिर बार-बार देहभान आ जाए, तो क्या अनुभव काम में आया? अनुभवी मूर्त हर सब्जेक्ट के अनुभवी मूर्त, हर शक्तियों के अनुभवी मूर्त। तो स्वयं में भी अनुभव को और बढ़ाओ, है,ऐसे नहीं कि नहीं है, लेकिन कभी-कभी है, समटाइम। तो बापदादा समटाइम नहीं चाहते हैं, समाथिंग हो जाता है, तो समटाइम भी हो जाता है क्योंकि आप सबका लक्ष्य है, पूछते हैं क्या बनने का लक्ष्य है? तो कहते हो बाप समान। एक ही जवाब सभी देते हो। तो बाप समान, तो बाप समटाइम और समाथिंग नहीं था, ब्रह्मा बाप सदा राज़युक्त,योगयुक्त, हर शक्ति में सदा, कभी-कभी नहीं। अनुभव जो होता है, वह सदाकाल चलता है, वह सम टाइम नहीं होता है। तो स्वयं अनुभवी मूर्त बन हर बात में, हर सबजेक्ट में अनुभवी, ज्ञान स्वरूप में अनुभवी, योगयुक्त में अनुभवी,धारणा स्वरूप में अनुभवी। आलराउण्ड सेवा मन्सा वाचा कर्मणा, सम्बन्ध-सम्पर्क सबमें अनुभवी, तब कहेंगे पास विद आनर। तो क्या बनने चाहते हो? पास होने चाहते हो या पास विद ऑनर बनने चाहते हो? पास करने वाले तो पीछे भी आयेंगे, आप तो टूलेट से पहले आ गये हो, चाहे अभी नये भी आये हैं लेकिन टूलेट का बोर्ड नहीं लगा है। लेट का लगा है, टूलेट का नहीं लगा है। इसीलिए चाहे कोई नये भी हैं लेकिन अभी भी तीव्र पुरूषार्थ करे, पुरूषार्थ नहीं तीव्र, तो आगे जा सकता है। क्योंकि नम्बर आउट नहीं हुआ है। सिर्फ दो नम्बर आउट हुए हैं, बाप और माँ। अभी कोई भी भाई बहन का तीसरानम्बर आउट नहीं हुआ है। भले आप कहेंगे दादियों से बहुत प्यार है, बाप का भी दादियों से प्यार है, लेकिन नम्बर आउट नहीं हुआ है। इसीलिए आप बहुत-बहुत सिकीलधे, लाडले भाग्यवान हो,जितना उड़ने चाहो उड़ो क्योंकि देखो जो छोटे बच्चे होते हैं ना उसको बाप अपनी अंगुली देके चलाता है, एकस्ट्रा प्यार करता है, और बड़े को अंगुली से नहीं चलाता है, अपने पांव से चलता है। तो नया भी कोई मेकप कर सकता है। गोल्डन चांस है। लेकिन जल्दी में जल्दी टूलेट का बोर्ड लगना है, इसलिए पहले ही कर लो। नये जो आये हैं पहली बारी, वह हाथ उठाओ। अच्छा। मुबारक हो। पहले बारी अपने घर मधुबन में पहुंच गये हो, इसलिए बापदादा और सारे परिवार चाहे देश वाले, चाहे विदेश वाले सबकी तरफ से पदम-पदमगुणा मुबारक हो।

अभी सुना – जितना हो सके योग्य आत्मायें देख करके अनुभवी मूर्त बनाओ। फिर आपको कहना नहीं पड़ेगा,आते रहो। आप कहेंगे नहीं आओ, तो भी आयेंगे। अनुभव ऐसी चीज़ है। स्वयं को भी अनुभव में बढ़ाओ, जितना-जितना अनुभव में और महादानी बनके सेवा में बिजी रहेंगे ना, तो यह जो टाइम वेस्ट होता है ना समस्याओं में, दादियों को भी समय देना पड़ता है और अपने को भी समय देना पड़ता है, वह समय बच जायेगा क्योंकि समय के महत्व को भी जानते हो, अचानक होना है। कई भाई बहिनें सोचते हैं थोड़ा सा इशारा मिल जाए ना, 10 साल हैं, 20साल है, कितना है, लेकिन बापदादा ने कह दिया है, अचानक होना है। एवररेडी रहना है। फास्ट गति करो अभी – स्वयं की भी, औरों को भी योग्य बनाने की। अच्छा है,फॉरेन की सेवा भी अच्छी वृद्धि को प्राप्त कर रही है। 90देशों तक पहुंच गये हो, बाकी क्या रहा! 10 तो और बढ़ाओ, 100 तो हो जायें। (जयन्ती बहन ने सुनाया, 129कन्ट्री तक पहुंच गये हैं, 100 में रजिस्ट्री भी हो चुकी है,बाकी में कुछ न कुछ बाबा का कार्य चल रहा है) अच्छा है, बापदादा ने अफ्रीका का भी समाचार सुना, वह भी थोड़े टाइम में अच्छी वृद्धि कर ली है। अच्छा है। बापदादा खुश होते हैं, कि मर्सीफुल आत्मायें हैं। आत्माओं के प्रति प्यार है, और देखो कहाँ-कहाँ से बच्चे पहुंचे हुए हैं चाहे और धर्म में भी चले गये हैं, कितने बिखर गये हैं। तो अपने परिवारको तो ढूंढकर निकालना है ना। अच्छा कर रहे हैं सभी। अभी दिल्ली में भी बड़ा प्रोग्राम, है तो मेला कामन, लेकिन नये रूप से करने से लोगों को भी रूचि होती है। लण्डन का प्रोग्राम भी बहुत अच्छा किया, और इतने लोगों को परिचय भी मिला, अभी जो एड्रेसेज हैं उससे कान्टैक्ट करके, जहाँ से भी आये, जिस प्रोग्राम में भी कोई आते हैं तो एड्रेस और फोन जरूर लिखाओ, चाहे 8-10 जगह पर रखो, क्योंकि तभी उन्हों को बुला करके, समय दे करके फिर उनको आगे बढ़ा सकेंगे। बाकी समय का बिगुल तो अचानक बजना है, उसके पहले अपने भाई बहिनों का कल्याण तो करना है ना। तरस आता है ना? अब छोटी-छोटी बातों में टाइम नहीं लगाओ। जैसे देखो मक्खी आती है, मच्छर आता है, ठहरने देते हो, फौरन उड़ा देते हो, कि बैठने देंगे। अच्छा मच्छर भले आओ। कोई भी समस्या क्या है? मच्छर और मक्खी तो है। फौरन भगाओ। उन्हों का काम है आना, माया आने का काम नहीं छोड़ती है, लेकिन ब्राह्मण भगाने के काम में कभी कभी थोड़ी देरी लगा देते हैं। बाकी बापदादा ने सभी देशों का कुछ-कुछ परिवर्तन किया है, वह लिखत देखी, 5-6 खण्डों का देखा। लेकिन परिवर्तन किया और लिखा है, उसकी मुबारक तो है लेकिन इसको अविनाशी बनाना। ऐसे नहीं कि कोई छोटी सी बात आ गई, परिवर्तन बदल जाये, यह नहीं करना। अमरभव का वरदान लो। जो परिवर्तन किया है, बापदादा ने सुना, कोई कोई ने परिवर्तन अच्छा किया है लेकिन सदा शब्द को कभी नहीं भूलना क्योंकि माया भी सुन रही है तो यह प्रतिज्ञा कर रहे हैं, वह भी तो अपना अजमाइस करेगी ना, लेकिन आप तो मायाजीत हो ना, मायाजीत तब तो जगतजीत बनेंगे। तो माया को देख करके, माया का आना देख करके आप याद करो मेरा काम भगाना है। वह भी आपको सिखलाती है, कि मैं आना नहीं छोडूंगी, आप विजय पाना नहीं छोड़ो, तो क्या? अभी छोटे-छोटे मच्छर और मक्खी को आने नहीं देना। सम्पूर्ण स्थिति के आगे यह छोटी-छोटी चीज़ें क्या हैं!

अच्छा आप सबकी प्यारी-प्यारी मीठी दादी सम्मुख आ गई है। (वीडियो कानफ्रेनसिंग से) बहुत मीठा मुस्करा रही है | देखो सभी हाथ हिलाओ, देखेगी वहाँ दिखाई देगा। अच्छा है। देखो, दादी ने ब्रह्मा बाप से भी ज्यादा समय सेवा का पार्ट बजाया है। तो विशेष हीरो एक्टर है ना। देखो दादी आपको देख करके सभी बहुत-बहुत खुश हो रहे हैं। (दादी ने सभी डबल विदेशियों को खास याद देते दीवाली की मुबारक दी) देखो, यह भी प्रैक्टिकल दिवाली है ना, आप प्रैक्टिकल इतने जगे हुए दीपक चमक रहे हो तो दादी को दीवाली याद आ रही है। कितनी रिमझिम है, एक एक के मस्तक में आत्मा चमक रही है, तो यह दीपक कितने अच्छे हैं, अविनाशी दीपक हैं। (दादी ने कहा – सभी बाबा-बाबा कर रहे हैं, बाबा आपकी बहुत याद आ रही है) अभी जल्दी आ जायेगी। देखो, बीमारी कितनी भी हो लेकिन दर्द की फीलिंग नहीं हो तो वह बीमारी आराम देती है। हीरो एक्टर है ना, शान्ति की देवी है। अभी जल्दी आ जायेगी, मिलेगी आप सबसे। अच्छा, लण्डन के प्रोग्राम का जस्ट ए मिनट ग्रुप:- बहुत अच्छा यह विशेषता अच्छी रही जो एक साथ और देशों ने भी भाग लिया या देखा भी, तो यह नवीनता अच्छी रही और इसको और भी रिफाइन कर एक ही समय पर अनेक तरफ एक ही सेवा का आवाज हो। तो यह अच्छा है। रिफाइन होता जायेगा और बढ़ता जायेगा तो सभी को पता पड़ेगा कि एक ही समय पर एक ही आवाज चारों ओर गूंज रहा है, तो सभी ने मेहनत बहुत अच्छी की और दिल से किया और विशेषता लण्डन की यह रही कि बड़ी दिल से बेफिक्र होकरके किया। इसकी मुबारक हो। कोई भी प्रोग्राम अगर बड़ी दिल से करते हैं तो अच्छा होता है। क्या होगा, कैसे होगा, यह कै कै नहीं आवे, होना ही है, करना ही है, सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। तो यह अच्छा रिजल्ट है। बड़ी दिल लण्डन की है ही। जनक बच्ची की बड़ी दिल नम्बरवन है क्यों, क्या नहीं सोचती। और हो ही जाता है। सभी ने देखा होगा तो कितना सहज हो गया। बापदादा ने सुना कि खर्चा तो हुआ लेकिन और ही बचत हुई। बच गया, और ही बढ़ गया, कम नहीं हुआ। तो यह किसकी कमाल है? बड़े दिल की। कभी भी कोई भी प्रोग्राम करो तो पहले बड़ी दिल करेंगे तो सफलता होगी। तो मुबारक है। बड़ी दिल की और बड़े प्रोग्राम की। बाकी रिफाइन तो होता रहेगा। एडीशन तो होती रहेगी। अभी पीठ करना, इतने जो आये, उनसे कम से कम कुछ तो सम्बन्ध सम्पर्क वाले स्टूडेन्ट तो बने ना, बनेंगे। (अमेरिका की मोहिनी बहन का बहुत अच्छा सहयोग रहा) सभीने मिलके किया है ना। अच्छा है। बहुत अच्छा। संगठन की शक्ति कमाल करती ही है। तो संगठित होकरके किया, सफलता है, सफलता रहेगी। थकावट नहीं हुई ना। खुशी हो गई। जब देखा सभा में रौनक हो गई तो खुशी हो गई। अच्छा। मुबारक हो।

आई.टी. ग्रुप:- अच्छा है आप लोगों के कार्य से सभी तरफ जो समाचार मिलता है तो सभी की दिल खुश हो जाती है क्योंकि परिवार है ना, तो परिवार में समाचार मिलने से खुशी होती है। तो अच्छा किया है, चलता तो रहता था काम, लेकिन अभी संगठित रूप में मिल करके कायदे प्रमाण कर रहे हैं, बढ़ा रहे हैं, यह बहुत अच्छा बनाया भी है और बढ़ाया भी है। इसमें आपोजीशन तो होगी लेकिन आप अपनी पोजीशन में दृढ़ हैं तो आपोजीशन खत्म हो जायेगी। आपोजीशन हो तब तो आपको उमंग आवे, यह करें, यह करें.. तो आपोजीशन पोजीशन को बढ़ा लेती है और सफलता मिलती भी है और मिलती रहेगी। यह निश्चित है। कभी भी कुछ भी हो जाए घबराना नहीं, सफलता आपके साथ है। आपोजीशन के साथ नहीं है,पोजीशन वालों के साथ है। बहुत अच्छा कर रहे हैं, हर एक देश में सिस्टम अच्छी बनाई है। (आई.टी.ग्रुप की मुख्य मोहिनी बहन हैं) अच्छा है, कोई कायदे प्रमाण निमित्त बनता है ना तो जो भी कार्य होता है उसमें कायदे से फायदा होता है। अच्छा हिम्मत रखकर उठाया है, इसकी बहुत-बहुत मुबारक हो। हर एक देश से बापदादा के पास समाचार आते रहते हैं, कैसे आपस में मीटिंग करते हो, कैसे आगे का प्लैन बनाते हो वह बापदादा के पास पहुंचते हैं इसीलिए मुबारक हो, मुबारक हो।

आर.सी.ओ ग्रुप:- अच्छा यह प्लैनिंग बुद्धि वाली आत्मायें हैं। नये-नये प्लैन बनाते रहते हो। चारों ओर सेवा की वृद्धि और ब्राह्मण आत्माओं में भी वृद्धि कैसे हो, विधि क्या हो, यह आपस में मिलकर जो मीटिंग करते हो वह बहुत अच्छा है। बापदादा के पास सब समाचार तो उसी समय ही पहुंच जाते हैं, क्योंकि बाप स्विच आन करता है टी.वी. का तो उसमें सब दिखाई-सुनाई देता है, तो बापदादा को पसन्द है। आपस में मिलके प्लैन और प्रोग्राम बनाते हो और प्रैक्टिकल में लाने का अच्छा पुरूषार्थ करते हो। बढ़ते चलो, बढ़ना है और सफलता बच्चों के गले का हार है। अच्छा है। मुख्य सभी इकट्ठे हो जाते हैं तो प्लैन भी ऐसे ही बड़े अच्छे बनते हैं। सभी देश के मिल जाते हैं। अच्छा, बहुत अच्छा। बढ़ते रहो, उड़ते रहो।

सेवा के निमित्त और भी मुख्य बहिनें बाबा के सामने खड़ी हुई:- अच्छा यह भिन्न-भिन्न देश की हैं, आपस में मिलके भविष्य सेवा के प्लैन बनाते हैं, चारों ओर के वायुमण्डल को जानकर, वायुमण्डल को भी एक दो की राय से पावरफुल बनाते हो क्योंकि वायुमण्डल का प्रभाव बहुत जल्दी पड़ता है। तो सेवा के भी प्लैन वृद्धि के बनाते हो और फिर सेन्टर्स के भी वायुमण्डल को शक्तिशाली बनाने के प्लैन जो आपस में राय सलाह करके बनाते हो, उससे देखा गया है कि समय प्रति समय वायुमण्डल अच्छा ही बनता जाता है। वृद्धि भी अच्छी है और विधि भी अच्छी है। और विधि की सिद्धि भी है। तो संगठन की शक्ति है ना! संगठन की शक्ति बहुत कमाल करती है, करना ही है। आपस का मिलना भी हो जाता है और सेवा की वृद्धि विधि भी हो जाती और एक दो के समीप भी आ जाते हैं। तो यह जो प्रोग्राम बनाया है, बापदादा को पसन्द है। और ड्रामानुसार आपको मधुबन का भी चांस मिल जाता है। यह संगठन बहुत करके मधुबन के वायुमण्डल में होता है। और भी संगठन की शक्ति को बढ़ाते जाओ। जब शक्ति सेना अपने को प्रत्यक्ष करेगी तब बाप प्रत्यक्ष होगा क्योंकि शक्ति और पाण्डवों के द्वारा ही बाप प्रत्यक्ष होना है। तो पहले शक्तियां या पाण्डव खुद अपने को सम्पूर्ण प्रत्यक्ष करेंगे तब बाप प्रत्यक्ष होगा। हर एक के चेहरे में बाप ही दिखाई देगा। इतनी संगठन में शक्ति है। तो अच्छा लगा। आप सभी को भी अच्छा लग रहा है ना। संगठन की शक्ति को बढ़ाते चलो। बाप को प्रत्यक्ष करते चलो। मुबारक हो। अच्छा है, मैजारटी भारत की बहनें हैं। देखो, पहले भारत गया है विदेश को जगाने, अभी विदेश भारत में जगायेगा। मैजारिटी भारत की है। तो विदेश भारत को कब जगायेंगे? यह आई.टी. ग्रुप जगायेगा? अच्छा है, कनेक्शन अच्छा हो रहा है।

सर्व अफ्रीका ग्रुप:- देखो, अफ्रीका वालों को एक बात की बहुत-बहुत मुबारक है – जो वायदा किया वह पूरा निभाया है। संगठन की शक्ति से एक दो के सहयोगी अच्छे बने हैं और ऐसे देश जहाँ अपने परिवार के लोग पहुंच गये हैं, उन भाई बहिनों को ढूंढकर निकालना, मेहनत भी की है, तो विधि भी अच्छी की है और समय पर सफलता प्राप्त कर ली है, उसकी बहुत-बहुत मुबारक हो। अच्छा किया है,मेहनत अच्छी की है। जो निमित्त बने हैं ना, वह भी आपस में संगठित रूप में अच्छे चले हैं और चल रहे हैं, यह भी है ना? (जयन्ती बहन को, आप भी उठो) अच्छा किया, एक दो का सहयोग अच्छा है। बापदादा को दिखाया था शक्तियां भी निमित्त हैं और पाण्डव भी निमित्त हैं। बहुत अच्छा रिकार्ड रखा है। बहुत अच्छा, सफलता की माला तो बापदादा पहना रहा है, वह माला तो क्या पहनायेंगे फिर उतार देंगे लेकिन सफलता की माला एक एक को बापदादा पहना रहा है। अच्छा। पदमगुणा मुबारक हो।

दिल्ली ओ.आर.सी. में एस.एम.एल की ट्रेनिंग करने, कराने वाला ग्रुप:- अच्छा है जितना अभ्यास करते हैं उतना पुण्य कमाते हैं, दूसरों को सेवा करके परिवर्तन कराना, यह सेवा का पुण्य जमा हो जाता है और यह पुण्य वर्तमानसमय खुशी दिलाता है और भविष्य में भी जमा होता है। जितनों को करायेंगे, किसलिए किया है? कराने के लिए ना! तो इतने सारे हैण्ड कराने के लिए तैयार हो गये। तो कितने पुण्य जमा होंगे! सेवा अर्थात् पुण्य जमा करना, कोई भी ग्रुप हो। जितने भी ग्रुप ने भिन्न-भिन्न प्रकार की सेवायें की हैं, उन्हों का पुण्य जमा हो गया और जमा करते रहना। इसीलिए सीखे हो ना! होशियार हो गये ना! औरों को भी करा सकेंगे ना? एक दो को आगे बढ़ाना, यह भी अच्छा किया, निमित्त बने ना? निमित्त बनने वाले का भी पुण्य जमा होता है। तो बापदादा खुश है, लेकिन जो सीखा है वह सिखाने में नम्बरवन आना। अपने तक नहीं रखना। काम में लगाना। समय दिया है और निमित्त का समय लिया है तो और आगे बढ़ाना। मुबारक हो, मुबारक हो। बहुत अच्छा, जो ग्रुप में नहीं भी उठे हैं, उन्हों को भी बहुत-बहुत मुबारक है। किसी न किसी सेवा में तो आपका भी ग्रुप है, इसीलिए इनएडवांस मुबारक हो।

अच्छा – अभी सेकण्ड में जिस स्थिति में बापदादा डायरेक्शन दे उसी स्थिति में सेकण्ड में पहुंच सकते हो! कि पुरूषार्थ में समय चला जायेगा? अभी प्रैक्टिस चाहिए सेकण्ड की क्योंकि आगे जो फाइनल समय आने वाला है, जिसमें पास विद ऑनर का सर्टीफिकेट मिलना है, उसका अभ्यास अभी से करना है। सेकण्ड में जहाँ चाहे, जो स्थिति चाहिए उस स्थिति में स्थित हो जाएं। तो एवररेडी। रेडी हो गये। अभी पहले एक सेकण्ड में पुरूषोत्तम संगमयुगी श्रेष्ठ ब्राह्मण हूँ, इस स्थिति में स्थित हो जाओ…. अभी मैं फरिश्ता रूप हूँ, डबल लाइट हूँ…, अभी विश्व कल्याणकारी बन मन्सा द्वारा चारों ओर शक्ति की किरणें देने का अनुभव करो। ऐसे सारे दिन में सेकण्ड में स्थित हो सकते हैं! इसका अनुभव करते रहो क्योंकि अचानक कुछ भी होना है। ज्यादा समय नहीं मिलेगा। हलचल में सेकण्ड में अचल बन सकें इसका अभ्यास स्वयं ही अपना समय निकाल बीच-बीच में करते रहो। इससे मन का कन्ट्रोल सहज हो जायेगा। कन्ट्रोलिंग पावर, रूलिंग पावर बढ़ती जायेगी। अच्छा – चारों ओर के बच्चों के पत्र भी बहुत आये हैं, अनुभव भी बहुत आये हैं, तो बापदादा बच्चों को रिटर्न में बहुत-बहुत दिल की दुआयें और दिल का याद प्यार पदम-पदमगुणा दे रहे हैं। बापदादा देख रहे हैं – चारों ओर के बच्चे सुन भी रहे हैं, देख भी रहे हैं। जो नहीं भी देख रहे हैं, वह भी याद में तो हैं। सबकी बुद्धि इस समय मधुबन में ही है। तो चारों ओर वे हर एक बच्चे को नाम सहित यादप्यार स्वीकार हो। सभी सदा उमंग-उत्साह के पंखों द्वारा ऊंची स्थिति में उड़ते रहने वाले श्रेष्ठ आत्माओं को,सदा स्नेह में लवलीन रहने वाले समाये हुए बच्चों को, सदा मेहनत मुक्त, समस्या मुक्त, विघ्न मुक्त, योगयुक्त, राज़युक्त बच्चों को, सदा हर परिस्थिति में सेकण्ड में पास होने वाले, हर समय सर्व शक्ति स्वरूप रहने वाले मास्टर सर्वशक्तिवान बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते। आप सबकी प्यारी दादी को भी बहुत-बहुत दुआयें और यादप्यार।

दादियों से:- यह मुक्त अवस्था भी बहुत काल की चाहिए। ग्रहचारी हो या विघ्न हो, कोई भी ऐसी चीज़ न रहे। स्वदर्शन चलाते रहें ना, तो परदर्शन, पराचिंतन खत्म हो जाए। पहले डबल विदेशी करके दिखायें, करेंगे ना?निमित्त बनके दिखाना। मायामुक्त, माया को विदाई दे दो,बाप की बधाईयां मिलेगी। माया को सदा के लिए विदाई देना अर्थात् बाप की बधाईयां लेना। (दादी की तरफ से मोहिनी बहन ने भाकी पहनी) आप सबको पता है कि आप सबकी एक परदादी भी है, तो वह भी बहुत मीठा पार्ट बजाने वाली है। उसने भी बहुत-बहुत बाप के साथ आप सबको भी बहुत याद भेजी है और बापदादा उसकी हिम्मत पर बहुत खुश है। कोई भी डाक्टर आता है, तो डाक्टर को भी ज्ञान देने शुरू कर देती है। डाक्टर उसको समझते हैं पेशेन्ट और वह उसको ज्ञान देकरके पेशेन्स में रहना सिखाती है। तो वह भी बहुत अच्छा पार्ट बजा रही है और याद में रह करके आगे से आगे उड़ रही है। बेड में होते भी उड़ रही है। तो सबने याद दी, परदादी को तो बहुत बड़ी याद चाहिए ना। अच्छा। बहुत अच्छा। (दादी की तरफ से मोहनी बहन ने और दादी जानकी ने बापदादा को भाकी पहनी) आप तो भाकी में हो, ऐसे औरों को भी लेना पड़ेगा। (मुन्नी बहन, ईशू दादी ने भी खास याद दी है) अच्छा – दादी के साथ सेवा के निमित्त बने हुए मुन्नी बच्ची,डाक्टर जी, और भी जो भाई बहिनें दिल से सेवा कर रहे हैं, अच्छी सेवा कर रहे हैं, इसीलिए दिल से सेवा करने वालों को बापदादा दिलाराम की दिल से दुआयें भी हैं, यादप्यार भी है। परदादी के भी सेवाधारियों को यादप्यार विशेष बापदादा दे रहे हैं। आप भी दे रहे हो ना? मुन्नी, ईशू, पारला की योगिनी और साथी भी सेवा अच्छी कर रहे हैं और हॉस्पिटल में जो ब्राह्मण आत्मायें सेवा कर रही हैं, उन सबको यादप्यार। (मुन्नी बहन कह रही हैं – 40 साल में बाबा पहली बार ऐसा हुआ है जो आप मधुबन में हो हम बम्बई में हैं) बापदादा आप सबको मधुबन में देख रहे हैं, कहाँ भी हो मधुबन में बाप के सामने हो। सामने हैं सिर्फ फरिश्ते रूप में हैं। (दादी बाबा को भाकी पहन रही है)

विदेश की बड़ी बहिनों से:- एक दो के विचार से, विचार लेकर संगठित रूप में सेवा में चल रहे हो इसकी मुबारक हो। बापदादा का जन्म से वरदान है। (सब टेन्शन मुक्त हैं) अगर इन्हों को टेन्शन होगा तो दूसरों का क्या हाल होगा! इन्हों के पीछे तो लाइन है ना। इन्हों को तो टेन्शन स्वप्न में भी नहीं क्योंकि लाइन बड़ी है। यह तो हैं लेकिन विश्व की भी लाइन है, वही लहर फैलेगी। हेल्थ भी अच्छी है, वेल्थ भी बहुत है, हैपी भी है। सब हेल्दी हैं, बापदादा को खुशी है कि भारत की बहनों ने विदेश सम्भाल लिया है। (बम्बई,दिल्ली की कमाल है) गुजरात भी है, गुजरात का नाम भी तो रखो ना। कारोबार भी अच्छी चल रही है। (इस बार जनवरी मास स्पेशल होगा) इस बार जनवरी मास ऐसा मनाओ जो विघ्नमुक्त का सर्टीफिकेट हो। सभी को सर्टीफिकेट मिले। नवीनता करो। नवीनता होगी तो उड़ जायेंगे। अभी उड़ने का ही समय है क्योंकि अचानक कुछ भी हो सकता है, हलचल का समय है। उसमें आप अचल। यही सबको वायब्रेशन आवे कि हम हलचल में हैं, यह अचल हैं। होना ही है। अच्छा है। बहुत-बहुत मुबारक।

दादी शान्तामणि, दादी मनोहर इन्द्रा, दादी रत्नमोहिनी:-त्रिमूर्ति मधुबन के निमित्त हो, मधुबन अर्थात् उसमें सब आ गया। तो निमित्त समझकर चलते चलो, उड़ते चलो। आदि रत्न तो हो ना। तो आदि रत्न में आदि देव के संस्कार आटोमेटिकली भरे हुए हैं, उसको प्रैक्टिकल में लाओ। सभी आप लोगों को देखके कितने खुश हो जाते हैं। तो खुशी दे रहे हो, खुशी देते रहेंगे। बहुत अच्छा। (दादी शान्तामणि) शान्तामणि दादी तो पांच चिड़ियाओं में भी है, जो निमित्त बनी, उसमें भी है।

Avyakt BapDada 31 December 2017 – अव्यक्त बापदादा मधुबन

31-12-07   ओम शान्ति    अव्यक्त बापदादा    मधुबन

             “नये वर्ष को समाप्ति वर्ष, श्रेष्ठ वर्ष और दुनिया को जगाने का वर्ष, इस रूप में मनाओ”

ओम् शान्ति। सभी जो भी बैठे हैं, एक ही परिवार है। ऐसा परिवार कभी सुना था, देखा था! नहीं। ऐसा अलौकिक परिवार अभी ही देखा और अभी सब भविष्य के लिए तैयार हो रहे हैं। तो सभी नया वर्ष, नया साल मनायेंगे, अभी अपनी वह नई दुनिया आ रही है, कितना बढ़िया है, आप सब भी भविष्य परिवार के पात्र तैयार दिखाई दे रहे हैं। तो सभी को नये वर्ष की मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो।

नये वर्ष में नया तो कुछ दिखाना ही है लेकिन ऐसा दिखायें जो जन्म-जन्म उसकी प्रालब्ध हमारे साथ हो।
(निवzर भाई और बृजमोहन भाई ने बापदादा से नये वर्ष के लिए विशेष प्रेरणायें पूछी, जैसे – नये वर्ष को क्या नाम दें, क्या विशेष अटेन्शन रखें, इसमें क्या पुरूषार्थ करें?)

नये वर्ष को समाप्ति वर्ष, श्रेष्ठ वर्ष और दुनिया को जगाने का वर्ष मानें और देखें कि कैसे यह वर्ष भी कमाल दिखाता है। जो भी सभी ब्राह्मण हैं वह सब उमंग में हैं कि आगे क्या होगा, जानते भी हैं कि क्या होगा! अभी तो नई दुनिया का सभी स्वप्न देख रहे हैं कि अभी नया वर्ष, नई रीति, नई प्रीत सब नया नया बदल रहा है। जैसे युग बदल रहा है, वैसे युग के साथ सब रीति-रिवाज, कायदे सब उसी प्रमाण चलने हैं। तो आज अपने नये संसार में जाने के लिए यही संकल्प करना है कि हमें पास तो होना ही है। दो पास, एक पास, पास (समीप) जाने की और दूसरी पास इम्तहान पास करने की, वह भी पास मिलनी ही है। पास तो आपको मिलेगी ही लेकिन पास के साथ यही बाबा चाहते हैं कि हर एक बच्चा अपने को किसी भी रीति से पास जरूर करे। यह समय ही पास करने का है, इसके लिए अभी अपने आपको चेक करो और भविष्य के ऊपर अटेन्शन दो, पास करना अर्थात् सब कुछ होते हुए भी जो भविष्य है उसको पास करने के लिए इतना पुरूषार्थ करे जो यही भविष्य हमारे साथ रहे और सबके मुख से यही निकले – पास पास पास। सभी की शक्लें बता रही हैं कि सभी ने अभी तक जो पुरूषार्थ किया है, पीछे किया है वा नहीं किया है वह बात और है लेकिन अभी इस समय फुल पास की एम रखी है और ब्राह्मण ही पास होंगे। ब्राह्मण हैं, तो ब्राह्मणों को पहली पहली सौगात यही है। और सारी सभा के अन्दर यही उमंग है तो अब जल्दी-जल्दी हम पास हो जायें तो कितनी सबको खुशी होगी। सभी खुश हैं अभी हम परिवर्तन होने वाले हैं।

(नये वर्ष के लिए देश विदेश के भाई बहिनों के लिए बाबा आपकी क्या प्रेरणा है, सब सुनना चाहते हैं)
सभी अपने को क्या समझते हैं! समझते हैं कि हमारा अधिकार तो है ही है कि समझते हैं पता नहीं क्या होगा, कैसा होगा! इसके विचार भले चलें लेकिन ठहर नहीं जायें। यह ठहरना अच्छा नहीं है। अभी तो हमको राज्यभाग्य लेना है। पहले अपने ऊपर राज्य, दूसरों पर तो रहता ही है, यह तो प्रसिद्ध हो रहे हैं कि स्व का राज्य बहुत बड़ा है और सब प्रश>> इसी विषय पर हैं या दूसरी कोई विषय सामने है? जैसे अभी का राज्य है, वैसे अभी इससे भी मजबूत राज्य आपका आ रहा है। हर एक उस भविष्य को देख खुश हो रहा है और आगे की प्रेरणा ले रहा है। बापदादा भी बच्चों को देख खुश है और समझते हैं कि बहुत कुछ मिल गया है और मिलना ही है।

सेवा का टर्न महाराष्ट्र, मुम्बई, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना का है, 15 हजार सेवाधारी आये हैं, टोटल 25 हजार हैं, 600 डबल विदेशी भाई बहिनें हैं:-
सब उमंग-उत्साह में हैं। बापदादा भी बच्चों को देख खुश है तो हर एक बच्चा पुरूषार्थ कर अपना या बाप का नाम प्रसिद्ध कर रहे हैं। आज बाप देख रहा था कि कौन, कौन कहाँ तक पहुंचें हैं! पहुंचें हैं, पुरूषार्थ अच्छा किया है। आगे विजय भी है। बाबा ने देखा कि सबने जो लक्ष्य रखा है वह प्रैक्टिकल में करके दिखायेंगे। यही सबमें उमंग है। इसी उमंग से यह ग्रुप आगे बढ़ता जाता है। हर एक बच्चे की विजय निश्चित है। विजय तो है लेकिन यह विजय अपने में आत्म विश्वास और परिवार में निश्चय को बढ़ा देती है। यही दोनों बातें अपने राज्य में काम में आयेंगी।

(संस्कार मिलन के लिए बहुत पुरूषार्थ करते हैं, फिर भी अभी सफल नहीं हैं, वह सफलता कैसे होगी, बुद्धि को बेहद में कैसे ले जायें, जो इन सब बातों से ऊपर चले जायें) सभी के पास लक्ष्य है, प्लैन है, अभी उस प्लैन के ऊपर अटेन्शन थोड़ा ज्यादा रहे, और सबको उसकी भासना आवे। भासना आने के लिए थोड़ा सा अटेन्शन इसमें देवें कि हमारे अन्दर जो परिवार का प्यार है, परिवार का प्यार संगम पर ही ज्यादा अनुभव कर सकते हैं। फिर तो नेचरल हो जायेगा।

लक्ष्य यही रखें कि होना ही है। सभी यही सोच रहे हैं कि यह इस बात पर क्यों सोच रहे हैं। हमारी पढ़ाई ठीक है और पढ़ने वाले भी ठीक हैं तो फिर यह क्वेश्चन तो है ही नहीं। अभी यही लक्ष्य रखो कि हम बनने ही हैं। उसमें आपका पार्ट सिर्फ सहयोगी बनने का नहीं है लेकिन खुद अपने को लायक बनाना है। अटेन्शन अपने ऊपर देना, यह जरूरी है। और बाबा ने देखा कि सबको इसका बहुत ख्याल है कि बनना ही है। बन रहे हैं, पुरूषार्थ अनुसार नम्बर लेंगे लेकिन पहले यह ध्यान रखो। जैसे बाबा पूछते हैं वैसे आप भी आपस में रूहरिहान करके जो राजधानी की सीट है वह अवश्य लेंगे। तो अभी यह संकल्प रखो कि अब राजधानी में क्या सीट लेनी है!

(बृजमोहन भाई को देखकर बाबा बोले)
अभी दिल्ली की राजधानी में बैठे तो हैं लेकिन अभी दिल्ली राजधानी के साथ भविष्य की राजधानी भी ध्यान पर रखनी है। (बाबा इसमें बहिनें नम्बर आगे ले लेती हैं) हमेशा ही देखा गया है जब रेस होती है ना तब मातायें, कन्यायें यह नम्बर ले लेती हैं। जब फाइनल होता है तो यही रिजल्ट निकलती है लेकिन आपके पास भी लक्ष्य है कि हमको नम्बर लेना है और पास होना है। तो बापदादा आौर ड्रामा दोनों तरफ ध्यान रखता है।

(फालो फादर कैसे करें) फालो फादर का अगर अटेन्शन है तो फिर प्रैक्टिकल लाइफ में सब प्रैक्टिकल दिखाई देना
चाहिए। तो जैसे बाप अभी चाहता है वैसा ही हो रहा है, टाइम पर सब ठीक हो जाता है लेकिन सदा ही यह बात हो। वह भी हो रही है और होगी ही इसलिए यह भी फिक्र नहीं है। सभी पुरूषार्थ कर रहे हैं और अभी सभी की बुद्धि में यही है कि हम नम्बर जरूर लेंगे। हो जायेंगे। तैयारी हो गई है। यह तो हुआ ही पड़ा है बाकी सिर्फ बीच-बीच में थोड़ा सा रूप बदलता है, तो उस बदलते हुए रूप से किसी न किसी रीति से कोई बात होती है, फिर ठीक हो जाती है इसलिए बापदादा भी इतना नहीं कह सकता है क्योंकि पुरूषार्थ का स्वरूप दिखाई दे रहा है। ऐसा नहीं है कि नहीं दिखाई देता है। देता है लेकिन सदा नहीं दिखाई देता। कभी कैसे, कभी कैसे। अभी इसको स्थिर करो और सब जोश दिखाओ कि हम सब तैयार हैं पेपर देने के लिए। सभी पेपर देने के लिए तैयार हैं, सभी से पूछो? पेपर देने के लिए तैयार हैं और उम्मींद है तो प्राप्ति भी इतनी है। वह नशा सदा नहीं रहता है, बीच-बीच में थोड़ा टाइम रहता है क्योंकि पुरूषार्थ करते हैं लेकिन यह नशा सदा रहे, इसका अभी अभ्यास चाहिए। अटेन्शन थोड़ा देना पड़ेगा। पढ़ाई है ना। पढ़ाई में अटेन्शन दिया जाता है। तो सभी को नये साल की मुबारक भी हो और इस नये साल में कदम आगे बढ़ाने का वरदान है।

अपने को बाप समान भरपूर और सदा तैयार रखना। जो भी समय है उस समय में अपने को ऐसे ही तैयार करें जैसे बाप चाहते हैं, जैसे बाप सर्वगुण सम्पन्न है, ताज, तख्तधारी है, ऐसे यह विशेषतायें हर एक बच्चा अपने में अनुभव करे। अभी भी समय है, जो कुछ रहा हुआ है वह सब अपने में धारण करके, धारणा रूप का साक्षात्कार कराओ। अभी क्या करें, कैसे होगा… नहीं। इसका क्वेश्चन पूछने की बात ही नहीं है। अभी बाप ने सबको हिम्मत दी है, उमंग दिया है तो उसी हिम्मत और उमंग इन दोनों को साथ लेकर सभी जल्दी-जल्दी आगे बढ़ो। अच्छा।

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