brahma kumaris

BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 26 OCTOBER 2017

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*Om Shanti*
*26.10.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

बच्चे, अब समय अनुसार समर्पण भाव को बढ़ाते जाओ। जितना-जितना समर्पण भाव को बढ़ाते चले जाओंगे … उतना ही मैं और मेरे-पन से दूर अर्थात् वैराग्य वृत्ति अर्थात् एकरस स्थिति अर्थात् निन्दा … स्तुति … सुख … दुःख … मान … अपमान … सबमें एक समान स्थिति हो जायेंगी।

बच्चे, जितना-जितना समर्पण भाव बढ़ता जायेगा, उतना ही अशरीरी स्थिति में स्थित होना easy हो जाएगा … इच्छाओं का अन्त हो जायेंगा … सन्तुष्टता … खुशी … और उमंग-उत्साह बना रहेगा, जिससे आप हल्के रह उड़ते रहोगे और कर्म करते भी कर्म से न्यारे रह कर्मातीत अवस्था हो जायेंगी।

बच्चे, इस स्थिति को ही बाप-समान स्थिति कहा जाता है। इस स्थिति में स्थित रहने से आप बच्चों को बहुत सहज कामयाबी मिलेगी और आपके संकल्प भी सिद्ध होने शुरू हो जायेंगे।

बस बच्चे, attention दे जो कुछ भी मेरा है उसे तेरा-तेरा करने का पुरूषार्थ करो … यहीं पुरूषार्थ आप बच्चों को PASS WITH HONOUR बना देगा।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 21 OCTOBER 2017

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*Om Shanti*
*21.10.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

जिन बच्चों ने knowledgeful बन, शिव बाप को साथ रख स्वयं को गुण स्वरूप और शक्ति स्वरूप बनाने का attention दिया है और इसमें सफलता भी प्राप्त की है, उन बच्चों के सम्पन्न स्वरूप ने अपना कार्य शुरू कर दिया है। चाहे उन आत्माओं की स्थिति स्थूल में हिसाब-किताब आने के कारण ऊपर-नीचे होती है, फिर भी वह आत्मायें knowledgeful बन बाप की श्रीमत प्रमाण अपना हिसाब-किताब चुक्तू करने का पुरूषार्थ कर रहे हैं अर्थात् दृढ़ता पूर्वक स्वयं पर attention दे बाप की श्रीमत प्रमाण कर्म व्यवहार में आते हैं … तो कुछ ही समय में अर्थात् हिसाब-किताब जोकि उन आत्माओं का बहुत ही थोड़ा-सा बचा है सहज ही खत्म हो जायेगा क्योंकि वह आत्मायें अपना नया हिसाब-किताब नहीं बना रहे हैं और हिसाब-किताब चुक्तू होते ही वह आत्मायें बाप-समान बन बाप के समीप बैठ विश्व-परिवर्तन का कार्य झटके से कर देंगी।

बच्चे, अभी आप तीनों कालों को जानते हो, लेकिन देख नहीं पा रहे हो, इसलिए हलचल में आते हो, परन्तु बाप पर 100% निश्चय रख स्वयं को विजय रत्न समझ ऊँचा पुरूषार्थ करो, ना ही अलबेले बनो … ना ही दिलशिकस्त अर्थात् ना ही थकना है … और ना ही हार खानी है। बस दृढ़ता पूर्वक अपने हर कर्म पर attention दे चलते जाना है। बस आप बच्चों को श्रीमत प्रमाण चलने का attention ही रखना है और सारा कार्य तो बाप स्वयं कर देंगे। बस बच्चे बेफिक्र बादशाह बन खुशी-खुशी उमंग-उत्साह के साथ उड़ते चलो।

जिन बच्चों की अंगुली स्वयं भगवान ने पकड़ी हो उन्हें रास्ते की क्या परवाह…?

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 19 OCTOBER 2017

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*Om Shanti*
*19.10.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

बच्चे, बाप की पढ़ाई ही परिवर्तन की है अर्थात् स्वयं को शरीर के बजाए आत्मा समझना।

आप बच्चों को हमेशा समझना है कि मैं आत्मा हूँ … विशेष आत्मा हूँ … साधारण नहीं हूँ …, मेरे सारे कर्म विशेष होने चाहिए।

बच्चे, ऐसा परिवर्तन तब ही सम्भव है जब आप स्मृति स्वरूप रहते हो अर्थात् आपको सदा याद रहे कि मैं Godly student हूँ … मैं देव लोक में जाने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ … मैं विश्व-परिवर्तक हूँ।

जब आप स्मृति स्वरूप स्थिति में रहते हो तब आपके पुराने संस्कार आते तो हैं परन्तु आप पर भारी नहीं होते। अर्थात् आप अपने पुराने संस्कारों को संकल्पों में ही खत्म कर देते हो, वाचा और कर्मणा तक नहीं लाते।

परन्तु, जब आप विस्मृत होते हो, तब आपके पुराने संस्कार अपना काम कर जाते हैं, जिससे कि आपका हिसाब-किताब बन जाता है। बच्चे अपना नया हिसाब-किताब बनाना बन्द करो, तब ही तो आप अपने पुराने हिसाब-किताब finish कर प्राप्तियों का अनुभव कर सकते हो। बस इसके लिए स्वयं पर attention की ज़रूरत है। जब आप बच्चों के अन्दर शिव बाप की knowledge समा जायेगी, तब आप अपना नया हिसाब-किताब नहीं बनाओंगे।

और जब आपके अन्दर बाप की याद समा जायेगी तब आप powerful बन जाओंगे, और आपके पुराने संस्कार जलकर भस्म हो जायेंगे। तब ही आप बाप-समान, गुण स्वरूप और शक्ति स्वरूप बन पाओगे।

बच्चे, बाप की पढ़ाई की एक-एक point को महीनता से समझ, उसे अपने जीवन में apply करो। ऐसे ही पढ़कर नासमझी में छोड़ मत दो। जितना आप बाप की समझानी को … बाप की याद को अपने जीवन में सदा प्रयोग करते जाओगे, उतना ही आपको सफलता मिलेगी। इससे आपका उमंग-उत्साह और खुशी बढ़ेगी। फिर तो आप हल्के हो अपनी मंज़िल पर समय से पहले पहुँच जाओगे।

परमात्मा बाप का यूँ आकर पढ़ाना – इसे आप हल्के रूप में मत लेना। जो इसकी importance को समझेगा, वहीं बाप-समान बन पायेगा अन्यथा वह अन्य आत्माओं से भी ज्यादा पश्चाताप की अग्नि में जलेगा और यही उसकी कल्प-कल्प की बाज़ी बन जायेगी।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 15 OCTOBER 2017

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*Om Shanti*

*15.10.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

बच्चे, अब अपनी एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाओ क्योंकि समय अनुसार एकाग्रता की शक्ति की अत्यधिक आवश्यकता है। एकाग्रता की शक्ति वाला ही अचानक के paper में pass हो पायेगा।

यदि अभी-अभी पुरूषार्थ खत्म हो जाएं तो आपकी result क्या होगी…? 
देखो बच्चे, पुरूषार्थ इसी तरह अचानक ही खत्म होगा और जिस बच्चे ने स्व-स्थिति के आसन पर अर्थात् ऊँच स्वमान में स्थित रहने का और शिव बाप को अपने संग रखने का अभ्यास किया होगा वो ही अचानक के paper में pass होगा।

बच्चे सोचते हैं कि हम अचानक के paper में तो pass हो जायेंगे परन्तु अचानक का paper बहुत भयानक होगा … जिस बात में आप कमज़ोर हो अचानक का paper उसी बात का आयेगा … और वह समय स्वयं के साथ-साथ बाप की याद भुलाने वाला होगा … वह समय ऐसा होगा जिसमें आप विस्मृत हो जाओगे अर्थात् आप स्वयं ही परिस्थिति में वा समय के बहाव में इतना ज्यादा उलझ जाओगे कि स्वयं की याद वा बाप की याद भूल जायेगी, परन्तु जो बच्चा अभी से ही अपने ऊँच स्वमान में स्थित होने की drill कर रहा है और साथ ही साथ अशरीरी बन अपने निराकार बाप के पास घर जाने का भी पुरूषार्थ कर रहा है अर्थात् जो स्वयं को आत्मा realize कर बाप के साथ सर्व सम्बन्ध जोड़ने का पुरूषार्थ कर रहा है अर्थात् बाप की श्रीमत पर चलने का 100% attention दे रहा है वो बच्चा ही अचानक के paper में बाप की मदद से PASS WITH HONOUR बन पायेगा।

इसलिए बच्चे, स्मृति स्वरूप बनो। मन-बुद्धि को एकाग्र करने का अभ्यास बढ़ाओ। बाबा बार-बार कह रहा है कि अचानक … अचानक … अचानक …।

तो इस बात की importance अर्थात् समय के महत्व को समझ … बाप की समझानी के महत्व को समझ पुरूषार्थ करो, अन्यथा बाप भी कुछ भी नहीं कर पायेगा…।
अन्तकाल आप अकेले हो जाओगे और वह घड़ी केवल पश्चाताप की होगी, इसलिए सोच-समझकर अपने एक-एक second को सफल करो। अभी का पुरूषार्थ ही अन्तिम विजय का आधार है।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 3 OCTOBER 2017

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*Om Shanti*
*03.10.2017*

बच्चे, आप अब अपने पुरूषार्थ में तत्पर रहो। अभी minor सा भी अलबेलापन वा लापरवाही ना हो, क्योंकि अब समय नहीं बचा है कि अभी भी पुरूषार्थ ऊपर-नीचे होता रहें…!

वैसे भी बहुत जल्दी ही वातावरण में तमोप्रधानता का प्रभाव अत्याधिक बढ़ जायेगा अर्थात् आश्चर्यजनक परिवर्तन हो जायेगा। और जिस आत्मा ने अपने ऊँच स्वमान और शिव बाप को कम्बाइन्ड रखने का ऊँचा पुरूषार्थ नहीं किया है, वह समय के बहाव में बह जायेगा और उस आत्मा के लिए मंज़िल पर पहुँचना नामुमकिन है…।
इसलिए बिना कुछ सोचे स्वयं पर attention रख ऊँचा पुरूषार्थ करो।

जब आप बच्चों का स्वयं के परिवर्तन पर full attention है अर्थात् परिवर्तन नज़र आ रहा है, और ऊँच स्वमान में स्थित हो बाप को याद करने का भी attention हैं, तो आप बेफिक्र रहो … आपका ज़िम्मेवार बाप है।
बस अलबेले मत बनना।

शिव बाप का आकर यूँ पढ़ाना, और इस समय किये गए पुरूषार्थ की value बहुत जल्दी ही आपको महसूस होगी। 
जिन्होंने अपना समय सफल किया होगा, उनकी तो बाप के साथ-साथ वाह-वाह होगी, और अन्य आत्मायें जो बाप की विशेष पालना लेकर भी खाली ही रह गई, उनपर क्या बीतेंगी…, वह तो आप सोच ही सकते हो…!

बस बाप की एक-एक बात पर निश्चय रख पुरूषार्थ करो क्योंकि अभी नहीं … तो कभी नहीं …।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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